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लोहाघाट रोडवेज की बदहाली पर कर्मचारियों में आक्रोश, 11 अक्टूबर को बनेगी आंदोलन की रणनीति
लोहाघाट। उत्तराखंड रोडवेज के लोहाघाट डिपो में बसों की कमी, वर्कशॉप और स्टेशन की बदहाली तथा विशेष श्रेणी और संविदा कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि डिपो में बसों की संख्या लगातार घट रही है। जो बसें संचालित हो रही हैं, उनकी स्थिति भी चिंताजनक है। डिपो में जरूरी स्पेयर पार्ट्स और टायर तक उपलब्ध नहीं होने से बसों के बीच रास्ते खराब होने का खतरा बना रहता है।
कर्मचारियों ने बताया कि कई चालक 20 वर्षों से अधिक समय से विशेष श्रेणी या संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक स्थायी नियुक्ति की उम्मीद पूरी नहीं हुई है। कर्मचारियों के मुताबिक पूरे महीने काम करने के बावजूद कई कर्मियों को 15 हजार रुपये से कम मानदेय मिल पाता है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी समस्याएं आखिर किसके सामने रखें। मुख्यमंत्री तक उनकी बात पहुंचाने वाला कोई नहीं है और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि रोडवेज की बदहाल व्यवस्था का सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ रहा है।
रोडवेज एम्पलाइज यूनियन के डिपो अध्यक्ष तरुण रावल ने कहा कि अब कर्मचारियों के सामने आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। 11 अक्टूबर को टनकपुर में पिथौरागढ़, लोहाघाट और टनकपुर डिपो के कर्मचारियों की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें आगामी संघर्ष की रणनीति तय की जाएगी।
कर्मचारियों ने रोडवेज की बसों की संख्या बढ़ाने, जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने, वर्कशॉप एवं स्टेशन की व्यवस्था सुधारने और लंबे समय से कार्यरत संविदा व विशेष श्रेणी कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की मांग उठाई है।