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देश की आर्डिनेंस फैक्ट्रियों के निजीकरण का घोर विरोध।
गिरीश उप्रेती।
देहरादून। देश की ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों के निगमीकरण और निजीकरण की कोशिशों के खिलाफ कर्मचारियों का आक्रोश एक बार फिर सड़क पर उतर आया है। ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ नॉन-गजेटेड ऑफिसर्स ऑफ ऑर्डनेंस एंड ऑर्डनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्रीज और अखिल भारतीय अराजपत्रित कर्मचारी संघ (नॉर्थ जोन) के आह्वान पर गुरुवार, 1 अक्टूबर को देश भर की सभी ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों में 'कॉर्पोरेशन दिवस' का पूर्ण बहिष्कार किया गया। संयुक्त यूनियनों के मंच से कर्मचारियों ने "नो पार्टिसिपेशन, नो सेलिब्रेशन" का नारा बुलंद करते हुए किसी भी सरकारी समारोह में भाग लेने से साफ़ इनकार कर दिया।
अखिल भारतीय अराजपत्रित कर्मचारी संघ के नॉर्थ जोन अध्यक्ष गिरीश चंद्र उप्रेती ने देहरादून में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्ष 1801 में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कोलकाता से शुरू हुआ देश का रक्षा निर्माण इतिहास 200 साल पुराना है। आजादी से पहले देश में 18 और आजादी के बाद 24 ऑर्डनेंस फैक्ट्रियां बनाई गईं। पूर्व की कई उच्च स्तरीय कमेटियों—ज़फ़ा, नायर, केलकर और टाटा कंसल्टेंसी—ने हमेशा इन फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण (मॉडर्नाइजेशन) की वकालत की थी। इसके बावजूद अक्टूबर 2021 में सरकार ने बिना किसी ठोस कमेटी की सिफारिश के 41 ऐतिहासिक ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों को जबरन भंग कर 7 अलग-अलग निगमों में बांट दिया।
कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि इस निगमीकरण के पीछे असली मकसद देश भर में फैली ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों की करीब 70 हजार एकड़ की बेशकीमती जमीन और संसाधनों पर कब्जा जमाना तथा धीरे-धीरे इसका निजीकरण करना है। कभी इन फैक्ट्रियों में 2 लाख से अधिक कर्मचारी काम करते थे, जिनकी संख्या लगातार घटाकर अब मात्र 80 हजार के आसपास समेट दी गई है। 2004 के बाद से एनपीएस लागू होने के बाद अब कॉरपोरेशन अपनी मनमर्जी से ठेकेदारी व्यवस्था और भर्तियों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे वर्षों से देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने वाले कुशल कारीगरों और कर्मचारियों के सेवा हितों पर सीधा कुठाराघात हो रहा है।
संघ ने आगाह किया कि आधुनिकीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये के फालतू सामान की खरीदारी हो रही है और अफसरों की तानाशाही बढ़ रही है, जबकि भारतीय रक्षा निर्माण की क्षमता और मशीनरी का पूरी दुनिया में कोई मुकाबला नहीं है। यूनाइटेड फेडरेशन ऑफ ऑर्डनेंस फैक्ट्री एम्प्लॉइज के साथ एकजुटता दिखाते हुए संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक कर्मचारियों के अधिकारों और फैक्ट्रियों के मूल स्वरूप की रक्षा नहीं होती, तब तक यह चरणबद्ध आंदोलन और बहिष्कार जारी रहेगा।