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पेयजल संकट से पर्यटन विस्तार तक, चंपावत के बदलते स्वरूप की कहानी
आईएसबीटी, स्वास्थ्य सेवाएं, रिवर्स पलायन और रोजगार योजनाओं के बीच सीमांत जिले में विकास को मिल रही नई दिशा
चंपावत। किसी भी जिले की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं बल्कि वहां रहने वाले लोगों की सुविधाओं, रोजगार और भविष्य की संभावनाओं से बनती है। चंपावत में बीते समय में विकास से जुड़े जिन विषयों को प्रमुखता मिली है, उनमें पेयजल, स्वास्थ्य, पर्यटन, सड़क संपर्क, रोजगार और रिवर्स पलायन प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल से इन क्षेत्रों में विभिन्न योजनाओं को आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है।
धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में मां पूर्णागिरि धाम, बाराही धाम, रीठा साहिब और गोल्ज्यू महाराज के मंदिरों को सुविधाओं और पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। पूर्णागिरि धाम में वर्षभर मेले की पहल को स्थानीय अर्थव्यवस्था के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। चंपावत को शिव धाम के रूप में विकसित करने तथा सप्तकोशी परिक्रमा जैसी योजनाओं से धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देने का प्रयास भी जारी है।
टनकपुर में आईएसबीटी की योजना जिले के परिवहन नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा नगरों में पार्किंग, ग्रामीण सड़कों का विस्तार और गांवों में खेल मैदानों का निर्माण आधारभूत सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों में शामिल हैं।
पेयजल के मोर्चे पर लोहाघाट और चंपावत के लिए किए जा रहे प्रयासों को स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही समस्या से जोड़कर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं में भी स्थानीय स्तर पर उपचार की क्षमता बढ़ाने पर जोर है। गंभीर परिस्थितियों में मरीजों को हेली सेवा के माध्यम से उच्च चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में स्थानीय महिलाओं द्वारा पिरूल से उत्पाद तैयार करने, स्वरोजगार अपनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान देने के उदाहरण सामने आए हैं। फलोत्पादन, बेमौसमी सब्जियां और पशुपालन भी ग्रामीण आय के महत्वपूर्ण साधन बन रहे हैं। जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में भी गतिविधियां जारी हैं।
रिवर्स पलायन को लेकर भी जिले में प्रयास किए जा रहे हैं। सुई गांव के महेश खर्कवाल लोगों को अपनी पैतृक भूमि से दोबारा जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार की योजनाओं के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और सुविधाओं का विस्तार होने से गांवों में लौटने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
कॉर्बेट ट्रेल को विकसित करने की योजना से चंपावत को व्यापक पर्यटन नेटवर्क से जोड़ने की उम्मीद है। धार्मिक, प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन के विभिन्न स्वरूपों को एक साथ विकसित करने से स्थानीय कारोबार और रोजगार को बढ़ावा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बनबसा में कैबिनेट बैठक को लेकर उत्साह
उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक बनबसा में आयोजित होने जा रही है। इसे लेकर स्थानीय लोगों में उत्सुकता है। लोगों ने मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि बैठक में सीमांत क्षेत्र और पूरे उत्तराखंड के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। स्थानीय लोगों ने देवी-देवताओं और लोक देवताओं से प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा विकास के लिए प्रार्थना की है।
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