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रामलीला के आदर्श अपनाएं, परिवार में बढ़ेगा प्रेम और सम्मान : प्रकाश कृष्ण शास्त्री।
कथा वाचक ने राम-लक्ष्मण के भाईचारे से प्रेरणा लेने और बच्चों को संस्कार देने पर दिया जोर
लोहाघाट। रामलीला केवल नाटक या मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले आदर्शों का स्रोत है। पुराणों के मर्मज्ञ एवं प्रसिद्ध कथा वाचक प्रकाश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि रामलीला के पात्रों के चरित्र को समझकर उनके आदर्श अपनाए जाएं तो परिवार में प्रेम, त्याग और सद्भाव का वातावरण बन सकता है।
उन्होंने संपत्ति को लेकर भाइयों के बीच बढ़ते विवादों पर चिंता व्यक्त की। कहा कि संकट में एक-दूसरे का सहारा बनने वाले भाई जब आपसी संबंध तोड़ लेते हैं, तब उन्हें श्रीराम और लक्ष्मण के जीवन से सीख लेनी चाहिए।
शास्त्री ने कहा कि श्रीराम ने पिता के वचनों की रक्षा के लिए राज्याभिषेक छोड़कर वनवास स्वीकार किया। लक्ष्मण के लिए वन जाना आवश्यक नहीं था, फिर भी अपने भाई को कष्ट से बचाने के लिए वह उनके साथ चले गए। यह संबंध अधिकार से अधिक प्रेम और कर्तव्य पर आधारित था।
उन्होंने शबरी के बेर स्वीकार करने के प्रसंग को आत्मीयता और भेदभाव से ऊपर उठकर सम्मान देने का संदेश बताया। शिक्षा के साथ संस्कारों पर जोर देते हुए उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को धार्मिक ग्रंथों और उनके जीवनोपयोगी संदेशों से परिचित कराने का आह्वान किया।
शास्त्री ने कहा कि धन-संपत्ति कितनी भी हो, यदि परिवार में संस्कार और सदाचार नहीं हैं तो सुख-शांति बनी नहीं रह सकती।
फोटो कैप्शन: आचार्य प्रकाश कृष्ण शास्त्री।