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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था पर लगाई रोक, राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी की अधिसूचना, कल से अग्रिम आदेशों तक बंद रहेगी चुनाव प्रकिया
देहरादून, 24 जून 2025 — त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर उत्तराखंड में जारी हलचल के बीच एक बड़ी कानूनी अड़चन सामने आई है। उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल द्वारा पंचायत चुनावों में आरक्षण प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद, राज्य निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना जारी कर समस्त पंचायत पदों पर आरक्षण आवंटन प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना संख्या 1242/रानिपो03आधु-2/4324/2025 के अनुसार, माननीय न्यायालय के आदेशानुसार ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य जैसे पदों पर आरक्षण का निर्धारण तब तक नहीं किया जा सकेगा जब तक कि उत्तराखंड सरकार द्वारा "उत्तराखंड ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत (आरक्षण एवं पदों का आवंटन) नियमावली, 2025" को विधिवत रूप से राजपत्र में अधिसूचित नहीं किया जाता।
क्या है मामला?
23 जून 2025 को उच्च न्यायालय ने रिट याचिका संख्या 410 (एम/बी) 2025 सहित अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आरक्षण प्रणाली के विरुद्ध याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को संज्ञान में लिया। न्यायालय ने पाया कि राज्य सरकार द्वारा जिन नियमों के तहत आरक्षण किया गया है, वे अभी तक राजपत्र में अधिसूचित नहीं हुए हैं। ऐसे में आरक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया गया है।
राज्य सरकार की अधिसूचना हुई निष्प्रभावी:
न्यायालय के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 21 जून को जारी अधिसूचना संख्या 1141 अब अमान्य मानी जाएगी, और उसके आधार पर किसी भी स्तर पर नामांकन, आरक्षण या निर्वाचन की प्रक्रिया नहीं की जाएगी।
क्या होगा आगे?
राज्य सरकार अब न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पुनः नियमावली को विधिवत अधिसूचित कर सकती है या संशोधन कर अदालत में पक्ष रखेगी। तब तक, पंचायत चुनाव की आरक्षण सूची पर अनिश्चितता बनी रहेगी और इससे नामांकन प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष:
पंचायत चुनावों की तैयारी में जुटे उम्मीदवारों और प्रशासन के लिए यह एक बड़ा झटका है। राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों की नजर अब राज्य सरकार की अगली कार्रवाई और न्यायालय की सुनवाई पर टिकी हुई है।