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उत्तराखंड में 250 की आबादी वाली बसावटों को बारहमासी सड़क से जोड़ने का कार्य शुरू
देहरादून, 28 मार्च 2025: उत्तराखंड में अब न्यूनतम 250 की आबादी वाली बसावटों को बारहमासी सड़क से जोड़ने का कार्य शुरू हो गया है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण की गाइडलाइन जारी कर दी है, जिसके तहत 8750 किमी लंबी 1490 सड़कों के निर्माण का सर्वे पूरा कर लिया गया है।
ग्रामीण सड़कों के विकास की नई योजना
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की शुरुआत वर्ष 2000 में सड़क विहीन गांवों को जोड़ने के लिए की गई थी। योजना के पहले तीन चरणों के तहत 2001 की जनगणना के आधार पर 250 से अधिक आबादी वाले गांवों को सड़क से जोड़ा जा चुका है। अब, केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर भी न्यूनतम 250 की आबादी वाली बसावटों को सड़क मार्ग से जोड़ा जाएगा।
उत्तराखंड में 1490 नई सड़कों का सर्वे पूरा
ग्राम्य विकास विभाग के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 8750 किमी लंबी 1490 ग्रामीण सड़कों का सर्वे पूरा हो गया है। सचिव ग्राम्य विकास राधिका झा ने बताया कि इन सड़कों के डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) बनाने का कार्य भी शुरू हो गया है, जिसे जल्द ही अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
योजना के तहत, सड़कों के निर्माण के साथ-साथ जरूरत के अनुसार पुलिया, कॉजवे और बड़े पुलों का भी निर्माण किया जाएगा, ताकि ग्रामीणों को हर मौसम में सुगम यातायात की सुविधा मिल सके।
उत्तराखंड को मिलेगा विशेष लाभ
योजना की गाइडलाइन के अनुसार, आबादी का निर्धारण केवल राजस्व गांवों या पंचायतों के आधार पर नहीं किया जाएगा। बल्कि, एक निश्चित दायरे में मौजूद बसावटों को मिलाकर आबादी का निर्धारण किया जाएगा।
उत्तराखंड में 1.5 किमी के दायरे में स्थित बसावटों को जोड़कर उनकी कुल आबादी के आधार पर योजना का लाभ दिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे विकासखंडों में यह सीमा बढ़ाकर 10 किमी तक कर दी गई है।
इससे उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य को अधिक लाभ मिलेगा, जहां कई छोटी बसावटें फैली हुई हैं।
इस परियोजना के तहत, सुदूरवर्ती गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ने से न केवल ग्रामीण विकास को गति मिलेगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।