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धराली त्रासदी पर कर्नल अजय कोठियाल का कड़ा प्रहार, आपदा प्रबंधन पर उठाए गंभीर सवाल
धराली त्रासदी पर देश की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर पूर्व सैन्य अधिकारी व आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ कर्नल अजय कोठियाल ने विश्व आपदा प्रबंधन समिट में मंच से तीखे शब्दों में सवाल उठाए। उनका बयान न सिर्फ भावुक था, बल्कि व्यवस्था की असल हकीकत को उजागर करने वाला भी रहा।
धराली में 147 लोग अभी भी मलबे में दबे पड़े हैं… और हम एक को भी नहीं निकाल पाए!
कर्नल कोठियाल ने कहा कि यह स्थिति सीधे-सीधे आपदा प्रबंधन की असफलता को दिखाती है।
उन्होंने कहा-
सेना ने अपने सात जवानों को तो बाहर निकाल लिया, लेकिन बाकी नागरिकों को हमने यूँ ही छोड़ दिया… उनके परिवार बर्बाद हो चुके हैं।
वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग क्यों नहीं?
उन्होंने सवाल उठाया कि:
आपदा प्रबंधन विभाग मौके पर कैंप क्यों नहीं लगा रहा?
प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों की टीम धराली क्यों नहीं पहुंची?
तकनीकी विशेषज्ञों की मदद कहाँ है?
NDRF पर गंभीर आरोप
कर्नल कोठियाल ने आरोप लगाया कि-
NDRF जैसे विशेष प्रशिक्षित बल से मजदूरी करवाई जा रही है, जबकि असली वैज्ञानिक और तकनीकी सहायता मौके पर गायब है।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चेतावनी
उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी आंतरिक आपदाओं से ही इस तरह लड़ेंगे, लोगों को यूँ ही मरने देंगे, तो चीन जैसे पड़ोसियों का मुकाबला कैसे करेंगे?
चीन हिमालय में आगे बढ़ रहा है और हम पीछे धकेले जा रहे हैं।
व्यवस्था के सामने कड़े सवाल
कर्नल कोठियाल के बयान ने केंद्र और राज्य-दोनों सरकारों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, वैज्ञानिक संस्थानों और प्रशासनिक मशीनरी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
धराली में अब भी 147 से अधिक लोग मलबे में दबे हैं और असल सवाल यही है-
हम कब तक रिएक्टिव रहेंगे? कब प्रो-एक्टिव और तकनीकी रूप से सक्षम आपदा प्रबंधन तैयार करेंगे?