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ब्रेकिंग न्यूज़: उत्तराखण्ड में संविदा और दैनिक वेतन भोगियों के लिए नियमितीकरण की राह हुई कठिन, 5 साल वाला नियम खत्म
देहरादून | 5 दिसंबर 2025:
उत्तराखण्ड शासन ने राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अस्थाई और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण (Regularization) को लेकर एक अहम और सख्त फैसला लिया है। सरकार ने 2013 की नियमावली में संशोधन करते हुए नियमितीकरण के लिए सेवा अवधि की शर्तों को पूरी तरह बदल दिया है।
क्या है नया आदेश?
कार्मिक एवं सतर्कता अनुभाग-2 द्वारा आज जारी अधिसूचना संख्या 138 के अनुसार, 'दैनिक वेतन, कार्यप्रभारित, संविदा, नियत वेतन, अंशकालिक तथा तदर्थ रूप में नियुक्त कार्मिकों का विनियमितीकरण (संशोधन) नियमावली, 2025' को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
इस संशोधन के जरिए सरकार ने 2013 की नियमावली के नियम 4(1) को प्रतिस्थापित (Replace) कर दिया है।
अब ये होंगी शर्तें:
नए नियमों के मुताबिक, अब नियमितीकरण का लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जो निम्नलिखित कड़ी शर्तों को पूरा करेंगे:
कर्मचारी ने 10 वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण कर ली हो।
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यह 10 वर्ष की अवधि दिनांक 04.12.2018 तक पूर्ण होनी अनिवार्य है।
पहले क्या था नियम?
इससे पहले लागू नियमों (विद्यमान उप नियम) के तहत, कर्मचारियों को नियमितीकरण के लिए केवल 5 वर्ष की निरंतर सेवा की आवश्यकता होती थी, जो नियमावली के प्रख्यापन की तिथि तक पूरी करनी होती थी। नए संशोधन ने इस अवधि को दोगुना कर दिया है और एक पुरानी कट-ऑफ डेट (2018) निर्धारित कर दी है।
किन कर्मचारियों पर पड़ेगा असर?
इस फैसले का सीधा प्रभाव दैनिक वेतन (Daily Wage), कार्यप्रभारित (Work-Charged), संविदा (Contract), नियत वेतन (Fixed-Pay), अंशकालिक (Part-Time) और तदर्थ (Ad-hoc) आधार पर नियुक्त हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा।
यह अधिसूचना राज्यपाल की सहर्ष स्वीकृति के बाद सचिव शैलेश बगौली के हस्ताक्षर से जारी की गई है।
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