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उत्तराखंड - आबादी के पास तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी अब बनी शोध का गंभीर विषय, लोग जता रहे है गहन चिंता - पारिस्थितिक तंत्र और खाद्य चक्र में असंतुलन हो सकता है मुख्य कारण
उत्तराखंड में आबादी वाले क्षेत्रों के पास तेंदुओं के असामान्य रूप से अधिक दिखने की घटनाएँ अब चिंता का विषय बन गई हैं। बीते कुछ महीनों में चम्पावत, पिथौरागढ़, नैनीताल, बागेश्वर, देहरादून और टिहरी समेत कई जिलों में तेंदुओं की सक्रियता तेजी से बढ़ी है। सुबह-शाम तो छोड़िए, रात में भी ये घटनाएँ लगातार सामने आने लगी हैं, जिससे ग्रामीणों और शहरी दोनों तरह के क्षेत्रों में भय का माहौल है।
वन विभाग के अनुसार, इस वर्ष तेंदुओं के दिखने की संख्या सामान्य से काफी अधिक है। पुराने बुजुर्ग लोग मान रहे हैं कि यह केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि अध्ययन और विस्तृत रिसर्च का विषय बन चुकी स्थिति है।
पारिस्थितिक तंत्र और खाद्य श्रृंखला में असंतुलन मुख्य वजह
जानकारों का कहना है कि जंगलों में प्राकृतिक भोजन की कमी, अनियंत्रित शहरीकरण, चरागाहों का खत्म होना और मानव गतिविधियों का पहाड़ों के भीतर तक बढ़ जाना तेंदुओं के व्यवहार में बदलाव का कारण है।
जंगलों में शिकार कम होने के कारण तेंदुए कुत्ते, बकरियाँ और छोटे पशुओं का पीछा करते हुए आबादी तक पहुँच रहे हैं।
कई मामलों में इंसान भी बन रहे हैं निशाना
पिछले दिनों राज्य के कई क्षेत्रों में तेंदुए द्वारा इंसानों पर हमले के मामले सामने आए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकेत है कि-
तेंदुए अपनी प्राकृतिक सीमाएँ छोड़ रहे हैं
भोजन की उपलब्धता बिखर गई है
वन्य जीवों का दबाव मानव बसावट पर बढ़ रहा है
उत्तराखंड जैसे वन्यजीव-घनत्व वाले राज्य के लिए गंभीर संकेत
उत्तराखंड का 65-70% क्षेत्र जंगलों से घिरा है और तेंदुओं की संख्या भी राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
ऐसे में तेंदुओं की मानव बस्तियों तक बार-बार आवाजाही इस बात का संकेत है कि-
जंगलों में शिकार चक्र टूट रहा है
पर्यावरणीय चक्रों (जल-कार्बन-खाद्य चक्र) में असंतुलन बढ़ रहा है
मानव-वन्यजीव संघर्ष आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है
अब जरूरी है वैज्ञानिक अध्ययन
वन विशेषज्ञों ने प्रस्ताव रखा है कि अब इस विषय पर-
व्यवहारिक अध्ययन
शिकार उपलब्धता सर्वेक्षण
मानव गतिविधियों के विस्तार का विश्लेषण
कैमरा ट्रैप आधारित मूवमेंट स्टडी
जंगलों में पानी व भोजन की उपलब्धता का निरीक्षण
जैसे विषयों पर शोध की आवश्यकता है।
स्थानीय लोगों में बढ़ती दहशत
पहाड़ों में सुबह-शाम टहलने वाले लोगों, बुजुर्गों, स्कूली बच्चों, भर्ती की तैयारी करने वाले युवाओं और मकानों के आसपास रहने वाले परिवारों में डर बढ़ रहा है। कई जगह लोग शाम के बाद बाहर निकलने से भी कतराने लगे हैं।
वन विभाग और प्रशासन की अपील
वन विभाग ने लोगों से-
रात में अकेले न निकलने,
बच्चों को बाहर न छोड़ने,
कूड़ा-कचरा खुले में न रखने,
स्ट्रीट लाइट लगाने
जैसी एहतियात बरतने की अपील की है।