🔊
उत्तराखंड में परंपराएं टूटीं, मजबूरी जीती: टायर-डीजल से हुआ अंतिम संस्कार, क्या इतनी मर चुकी हैं संवेदनाएं, चिता जलाने को करना पड़ा डीजल का सहारा।
श्रीनगर (गढ़वाल)।
अलकेश्वर घाट पर शनिवार को एक बेहद हृदयविदारक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। 19 वर्षीय बालिका के निधन के बाद गमगीन परिवार जब अंतिम संस्कार के लिए घाट पहुंचा, तो उन्हें ऐसी पीड़ा झेलनी पड़ी, जिसकी कल्पना मात्र से ही रूह कांप उठे।
नम आंखों और कांपते हाथों से परिजनों ने अपनी लाडली को मुखाग्नि दी, लेकिन चिता सुलगकर ही रह गई। आरोप है कि प्राइवेट टाल संचालक ने पूरे पैसे लेने के बावजूद गीली और कच्ची लकड़ियां दे दीं, जिससे चिता ने आग पकड़ने से इंकार कर दिया। अपनी फूल सी बच्ची के शव को चिता पर यूं पड़ा देख परिवार का कलेजा फट गया। घाट पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं।
परिवार करीब चार घंटे तक चिता के पास बैठा बिलखता रहा, लेकिन लकड़ियां जलने का नाम नहीं ले रही थीं। इस दौरान शोक में डूबा परिवार किसी विवाद में पड़ने की स्थिति में भी नहीं था, और बेबसी में अपनी बच्ची को देखता रहा।
डीजल, टायर और ट्यूब से करना पड़ा अंतिम संस्कार
जब हर प्रयास विफल हो गया, तो मजबूर होकर परिजनों ने वह कदम उठाया जो न तो धार्मिक परंपराओं के अनुरूप है और न ही मानवीय संवेदनाओं के। बाजार से 15 लीटर डीजल मंगवाया गया, साथ ही 10 पुराने टायर, ट्यूब और कपड़े चिता में डाले गए। तब जाकर कहीं अंतिम संस्कार पूरा हो सका।
निगम पार्षद ने जताया रोष, कार्रवाई की मांग
इस अमानवीय घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। वार्ड संख्या 12 के पार्षद शुभम प्रभाकर ने नगर निगम को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने घाट पर सरकारी टाल की व्यवस्था न होने को भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया।
बताया जा रहा है कि घाट पर सरकारी लकड़ी टाल की सुविधा न होने के कारण परिवार को मजबूरी में निजी टाल से मनमाने दामों पर करीब तीन क्विंटल लकड़ी खरीदनी पड़ी।
यह घटना न सिर्फ एक परिवार के असहनीय दर्द को दर्शाती है, बल्कि मुनाफाखोरी की अंधी दौड़ में मरती हुई इंसानियत की भी कड़वी सच्चाई सामने लाती है।