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उत्तराखंड में आंगनबाड़ी भर्ती की शैक्षिक शर्तें बनीं विवाद का कारण, बाहर से पढ़ी बेटियों के साथ अन्याय की आशंका
देहरादून, 27 मई 2025
उत्तराखंड में चल रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती प्रक्रिया इन दिनों विवादों के घेरे में आ गई है। कारण है – भर्ती में मांगी गई शैक्षिक योग्यता की वह शर्त, जो राज्य के बाहर से पढ़कर आई महिलाओं के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है।
नवीनतम भर्ती विज्ञप्ति में यह शर्त शामिल की गई है कि आवेदिका ने इंटरमीडिएट (या समकक्ष) उत्तराखंड सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त बोर्ड / परिषद / संस्थान से ही उत्तीर्ण किया हो। इसके अलावा, आवेदिका को उसी राजस्व ग्राम की निवासी होना भी अनिवार्य किया गया है।
यह शर्तें उन हजारों महिलाओं के लिए समस्या बन गई हैं जो:
उत्तराखंड के बाहर से पढ़ी हैं (जैसे CBSE, राजस्थान बोर्ड, यूपी बोर्ड आदि से 10वीं–12वीं की शिक्षा ली है),
विवाह के बाद वर्षों से उत्तराखंड में रह रही हैं,
स्थानीय स्तर पर स्नातक / परास्नातक में अच्छे अंक प्राप्त कर चुकी हैं,
और सामाजिक व्यवहार, बच्चों की देखरेख व ग्रामीण गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
क्या बेहतर शिक्षा और सामाजिक अनुभव अब अयोग्यता बन गया है? – यह सवाल अब ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाएं उठा रही हैं। कई शिक्षित महिलाएं, जो आंगनवाड़ी सेवा में योगदान देने को तैयार थीं, अब खुद को अनावश्यक रूप से बाहर किया गया महसूस कर रही हैं।
समस्या के मुख्य बिंदु:
राज्य से बाहर की बोर्ड परीक्षाएं मान्य नहीं
हाई स्कूल औऱ इंटरमीडिएट दोनों शर्तें एक साथ
नवविवाहित महिलाओं पर सीधा असर
योग्य और अनुभवी महिलाओं की अनदेखी
समाधान की माँग:
जनप्रतिनिधियों व महिला संगठनों ने मांग की है कि—
1. उत्तराखंड में स्थायी रूप से निवास करने वाली महिलाओं को मौका दिया जाए,
2. राज्य के बाहर से पढ़ाई करने वाली महिलाओं की उच्च शिक्षा व सामाजिक अनुभव को वरीयता दी जाए,
3. चयन प्रक्रिया में लचीलापन रखा जाए, जिससे योग्य महिलाएं वंचित न रहें।
यदि जल्द ही नीति में बदलाव नहीं हुआ, तो यह भर्ती प्रक्रिया कई महिलाओं के लिए निराशा और अन्याय का कारण बन सकती है।