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पूंजी, तकनीक और संस्थागत सहयोग से ही बदलेगी उत्तराखंड के विकास की तस्वीर: राज शेखर जोशी।
BRICS चर्चाओं के अनुभव साझा कर बोले सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष-पर्यटन, कृषि, स्वास्थ्य और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी में उत्तराखंड के लिए अपार संभावनाएं।
चम्पावत। प्रदेश के सतत, समावेशी और दीर्घकालिक विकास के लिए पूंजी, आधुनिक तकनीक और विभिन्न संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग को जरूरी बताते हुए सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी ने विकास की नई दिशा पर जोर दिया है। BRICS के अंतर्गत सतत विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विषयों पर हुई चर्चाओं के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के लिए विकास का मॉडल स्थानीय जरूरतों, आधुनिक तकनीक और मजबूत संस्थागत साझेदारी पर आधारित होना चाहिए।
राज शेखर जोशी ने कहा कि प्रदेश और देश के समग्र विकास के लिए पर्याप्त पूंजी के साथ-साथ सरकारी संस्थानों, निजी क्षेत्र, निवेशकों और विशेषज्ञ संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने नीति आयोग के साथ अपने अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में यदि पर्याप्त पूंजी, आधुनिक संसाधन और रणनीतिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो उत्पादकता में बड़ी वृद्धि की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में निवेश की संभावनाएं केवल पर्यटन तक सीमित नहीं हैं। कृषि, स्वास्थ्य सेवाएं, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी तकनीक और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसे क्षेत्र हैं, जहां बड़े स्तर पर काम किया जा सकता है। इन क्षेत्रों में निवेश और तकनीकी सहयोग से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी जा सकती है।
जोशी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतियों के साथ कई अवसर भी लेकर आती हैं। जरूरत इस बात की है कि उपलब्ध प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधनों को आधुनिक तकनीक और निवेश के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर के साझेदारों तथा निवेशकों का उत्तराखंड में स्वागत है। पर्यटन, कृषि, स्वास्थ्य और क्लाइमेट चेंज टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी प्रदेश को सतत विकास की दिशा में नई गति दे सकती है। राज शेखर जोशी ने विश्वास जताया कि यदि पूंजी, तकनीक और संस्थागत सहयोग को एक मंच पर लाया जाए तो उत्तराखंड में ऐसा विकास मॉडल तैयार किया जा सकता है, जिसमें आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और आमजन की भागीदारी को भी प्राथमिकता मिले।
फोटो : BRICS चर्चाओं के अनुभव साझा करते सेतु आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राज शेखर जोशी।