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माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव में दिखी देवभूमि की सांस्कृतिक छटा, स्कूली बच्चों की भव्य झांकी ने मोहा मन।
माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव में दिखी देवभूमि की सांस्कृतिक छटा, स्कूली बच्चों की भव्य झांकी ने मोहा मन।
चम्पावत। माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव-2026 के पावन अवसर पर गुरुवार को चम्पावत जिला मुख्यालय आस्था, भक्ति और लोक संस्कृति के रंग में सराबोर नजर आया। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर भव्य झांकी निकाली। बच्चों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया और देवभूमि की समृद्ध लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक देखने को मिली।
झांकी में शामिल स्कूली बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक परिधानों में सजे छात्र-छात्राओं ने लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़े विभिन्न स्वरूपों का सुंदर प्रदर्शन किया। झांकी के दौरान पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में नजर आया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु झांकी देखने पहुंचे और बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्रवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ नंदा-सुनंदा देवभूमि उत्तराखंड की अगाध आस्था, देव संस्कृति और जन-आकांक्षाओं की प्रतीक हैं। ऐसे पारंपरिक और भव्य आयोजन हमारी पौराणिक संस्कृति एवं लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने महोत्सव के सफल आयोजन की बधाई देते हुए क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना की तथा बच्चों द्वारा प्रस्तुत झांकी की सराहना की।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी मनीष कुमार ने भी प्रतिभाग किया। जिलाधिकारी ने ऐतिहासिक बालेश्वर मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और जनपद की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने झांकी का अवलोकन कर छात्र-छात्राओं से मुलाकात की और उनका उत्साह बढ़ाया।
युवाओं और बच्चों को अपनी लोक संस्कृति एवं परंपराओं से जोड़ने, उनका उत्साह बढ़ाने तथा उन्हें नशे जैसी बुराइयों से दूर रखकर सकारात्मक दिशा में प्रेरित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी मनीष कुमार ने बालेश्वर मंदिर समिति, स्थानीय युवाओं और बच्चों को ‘मा. मुख्यमंत्री संस्कृति संवर्धन किट’ भेंट की।
जिलाधिकारी ने कहा कि माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव हमारी सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। महोत्सव में स्कूली बच्चों की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से मजबूती से जुड़ी हुई है। उन्होंने आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि जिला प्रशासन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए सदैव तत्पर है।
महोत्सव में आस्था, लोक संस्कृति और नई पीढ़ी का उत्साह एक साथ देखने को मिला। बच्चों की भव्य झांकी ने जहां लोगों को आकर्षित किया, वहीं संस्कृति संवर्धन किट के माध्यम से युवाओं और बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश भी दिया गया।
फोटो : चम्पावत में माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव के दौरान पारंपरिक वेशभूषा में भव्य झांकी प्रस्तुत करते स्कूली बच्चे एवं झांकी का अवलोकन करते जिलाधिकारी मनीष कुमार।