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संस्कृत शिक्षा के विस्तार की ओर चंपावत, पूर्वांचल विद्यालय को आवासीय स्वरूप देने की पहल
मुख्यमंत्री धामी ने विभाग से मांगा प्रस्ताव, डॉ. विनय बोले-संस्कृत के साथ रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी
चंपावत। धर्म और संस्कृति के संरक्षण के साथ संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने की दिशा में चंपावत में एक और महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्षेत्र की पुरानी मांग को गंभीरता से लेते हुए पूर्वांचल एंग्लो संस्कृत विद्यालय को आवासीय विद्यालय में तब्दील करने के लिए विभाग से प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री की इस पहल से वर्षों से चली आ रही मांग के पूरा होने की उम्मीद जगी है।
उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. विनय विद्यालंकार ने बताया कि मुख्यमंत्री का लक्ष्य देवभूमि में संस्कृत भाषा को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन भाषा ही नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, ज्ञान और परंपराओं को अपने भीतर समेटे हुए भाषा है। संस्कृत को जनवाणी का स्वरूप देने के प्रयासों से इस भाषा के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सामने आ रहे हैं।
डॉ. विद्यालंकार ने कहा कि संस्कृत के जानकारों की मांग देश ही नहीं, विदेशों में भी है। विदेशों में बसे भारतीय परिवार धार्मिक अनुष्ठानों, कथा, पुराण और कर्मकांड के लिए संस्कृत के विद्वानों पर निर्भर रहते हैं। संस्कृत के क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए इस कारण रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि आजादी के बाद संस्कृत को जिस सम्मान और स्थान की आवश्यकता थी, वह अब धीरे-धीरे मिल रहा है। मुख्यमंत्री के प्रयासों से उत्तराखंड में संस्कृत के विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में संस्कृत उत्तराखंड की दूसरी राजभाषा के रूप में और मजबूत पहचान बनाने में सफल होगी।
फोटो—पूर्वांचल एंग्लो संस्कृत विद्यालय, चंपावत।