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बिरगुल की पहली रामलीला में बालिकाओं ने बांधा समां, राम वनगमन पर नम हुईं आंखें।
राम, लक्ष्मण और सीता की भूमिकाओं में बेटियों का प्रभावशाली अभिनय, नशे के खिलाफ पहल भी लाई बदलाव
लोहाघाट। बिरगुल गांव में पहली बार आयोजित रामलीला ने आसपास के गांवों को भक्ति और सामाजिक एकजुटता के सूत्र में जोड़ दिया है। श्रीराम, लक्ष्मण और सीता की भूमिकाओं में बालिकाओं के प्रभावशाली अभिनय ने आयोजन को विशेष बना दिया है। राम वनगमन का भावपूर्ण मंचन देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
पहले गांव में कृष्ण लीला का आयोजन होता था। इसके बाद ग्रामीणों को रामलीला शुरू करने की प्रेरणा मिली। शिक्षक रमेश चंद्र जोशी की अध्यक्षता में गठित रामलीला कमेटी ने आयोजन की शुरुआत से ही नशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। आयोजकों के अनुसार, इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ा है और लीला में नशे की हालत में आने की प्रवृत्ति पर रोक लगी है।
लीला निदेशक मोहन जोशी और पाटी के प्रसिद्ध तबला वादक भीमलाल के मार्गदर्शन में कलाकारों की प्रतिभा निखरी है। भीमलाल पिछले 35 वर्षों से विभिन्न स्थानों पर रामलीला आयोजनों में सहयोग देते आ रहे हैं।
श्रीराम की भूमिका में साक्षी महराना, लक्ष्मण की भूमिका में शीतल भट्ट और सीता की भूमिका में सोनू भट्ट दर्शकों की सराहना बटोर रही हैं। रावण बने विजय सिंह महाराना, दशरथ की भूमिका निभा रहे जीवन महाराना और हनुमान बने सुनील महर का अभिनय भी दर्शकों को प्रभावित कर रहा है। कलाकारों की साज-सज्जा में डोली का योगदान मंचन का आकर्षण बढ़ा रहा है।
दर्जा राज्यमंत्री एवं सामाजिक कार्यकर्ता मदन सिंह महाराना आयोजन में सहयोग दे रहे हैं। प्रमुख भूमिकाओं में बालिकाओं की भागीदारी से उत्साहित आयोजक आने वाले वर्षों में पूरी तरह महिलाओं की रामलीला आयोजित करने पर भी विचार कर रहे हैं।
फोटो कैप्शन: बिरगुल की रामलीला में राम, लक्ष्मण और सीता की भूमिकाओं में अभिनय करती बालिकाएं।