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प्रदेश में जुलाई में पंचायत चुनाव की तैयारी, बारिश बनी बड़ी चुनौती, राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायतीराज विभाग चुनाव को लेकर जुटे तैयारियों में
चंपावत, 15 जून।
प्रदेश में लंबे समय से लंबित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। शासन की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, पंचायत चुनाव अगले महीने जुलाई में कराए जाने प्रस्तावित हैं। आरक्षण प्रक्रिया के बाद अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की प्रतीक्षा है। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष दोहरी चुनौती है एक तरफ बरसात के मौसम में सुरक्षित और सुगम मतदान सुनिश्चित करना, दूसरी ओर मत प्रतिशत को बनाए रखना।
गौरतलब है कि ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों का कार्यकाल वर्ष 2024 में समाप्त हो गया था। इसके बाद से दो बार पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति की गई पहले निवर्तमान जनप्रतिनिधियों को और फिर प्रशासनिक अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। अब शासन और आयोग, पंचायतों को निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को सौंपने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रहे हैं।
बरसात में पहली बार पंचायत चुनाव!
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जुलाई में चुनाव हुए तो यह राज्य गठन के बाद पहला मौका होगा जब बरसात के मौसम में पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय नदी-नालों और गधेरों के उफान पर होने के कारण मतदान दलों का दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल होगा, जिससे मत प्रतिशत पर सीधा असर पड़ेगा।
राज्य निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार का कहना है कि, पंचायत चुनावों को अनिश्चितकाल तक टालना संभव नहीं है। बारिश को ध्यान में रखते हुए सभी जिलाधिकारियों के साथ कंटीजेंसी प्लान तैयार किया जाएगा।
पिछली बार उत्साह, इस बार चिंता
अक्टूबर 2019 में हुए पंचायत चुनावों में प्रदेश का औसत मतदान 69.59 प्रतिशत रहा था, जिसमें ऊधमसिंह नगर में सर्वाधिक 84.26% और अल्मोड़ा में न्यूनतम 60.04% मतदान हुआ था। जबकि पर्वतीय जिलों में पौड़ी (61.79%), रुद्रप्रयाग (62.98%) और टिहरी (61.19%) में अपेक्षाकृत कम मतदान दर्ज किया गया।
पंचायत संगठन के प्रदेश संयोजक जगत मार्तोलिया ने कहा, बरसात के मौसम में पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जैसे जिलों में मलबा और उफनती नदियों के कारण कई बार यातायात पूरी तरह से ठप हो जाता है, ऐसे में चुनाव करवाना आसान नहीं होगा।
क्या होगा समाधान?
राज्य निर्वाचन आयोग अब मौसम की चुनौतियों के साथ-साथ सुरक्षित, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव के लिए रणनीति बना रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या आयोग बरसात के बीच में भी सुचारू चुनाव आयोजन की मिसाल पेश कर पाएगा या चुनाव कार्यक्रम में संशोधन की नौबत आएगी।