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अतिथि शिक्षकों का सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन शुरू, केवल मूल विषय पढ़ाने का लिया निर्णय
चंपावत/देहरादून।
राज्य भर के अतिथि शिक्षकों ने सरकार की वादाखिलाफी और शिक्षा विभाग की लगातार उपेक्षा से आहत होकर एक बार फिर आंदोलन की राह पकड़ ली है। माध्यमिक अतिथि शिक्षक संगठन उत्तराखंड के आह्वान पर राज्य के हजारों शिक्षक 22 जुलाई 2025 से चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर चुके हैं।
शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 10 वर्षों से पूर्ण निष्ठा और समर्पण के साथ शिक्षण कार्य में लगे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न तो स्थायीत्व का भरोसा मिला है, न ही मानदेय में कोई ठोस सुधार। शिक्षकों ने आरोप लगाया कि पिछले साल अगस्त 2024 में देहरादून स्थित शिक्षा निदेशालय में हुए 14 दिवसीय आंदोलन के दौरान सरकार ने दो माह में मांगें पूरी करने का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई।
अतिथि शिक्षकों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं —
पद सुरक्षित करना,
मानदेय में नियमित बढ़ोतरी,
वेतन विसंगतियों का निवारण,
चिकित्सा अवकाश जैसी बुनियादी सुविधाएं देना।
लेकिन इन सबके बावजूद विभाग लगातार 'एकतरफा फरमान' जारी करता रहा है, जिससे शिक्षकों में रोष बढ़ता जा रहा है।
क्या है आंदोलन की रूपरेखा?
आंदोलन के पहले चरण के तहत अतिथि शिक्षक अब से केवल अपने मूल विषय का ही अध्यापन करेंगे, इसके अलावा वे अन्य विषय पढ़ाने या गैर-शैक्षणिक कार्यों में हिस्सा नहीं लेंगे। संगठन का कहना है कि यदि मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को अगले चरणों में और तेज किया जाएगा।
सरकार से आग्रह
शिक्षकों ने सरकार से अपील की है कि आंदोलन की स्थिति बनने से पहले ही उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर गंभीरता से विचार कर निर्णय लिया जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को बाधित करना नहीं, बल्कि अपने सम्मान और अधिकारों के लिए आवाज उठाना है।
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