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उत्तराखंड में 4310 युवा बनेंगे आपदा मित्र, मिलेंगे प्रशिक्षण और आपातकालीन किट
देहरादून,
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), गृह मंत्रालय, भारत सरकार की युवा आपदा मित्र परियोजना के तहत उत्तराखंड में 4310 स्वयंसेवकों को आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। ये स्वयंसेवक फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में दक्ष होंगे और किसी भी आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग के सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने इस योजना को लेकर आज उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के अधिकारियों और एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र एवं भारत स्काउट-गाइड के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
योजना का उद्देश्य और महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रमुख परियोजनाओं – मेरा युवा भारत, युवा सेतु, सबका प्रयास और आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर 10 प्वाइंट एजेंडा को ध्यान में रखते हुए इस योजना को पूरे देश में लागू किया गया है।
श्री विनोद कुमार सुमन ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य समुदायों को व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से आपदाओं का सामना करने के लिए तैयार करना है। प्रशिक्षित स्वयंसेवक राहत और बचाव कार्यों में तेजी से मदद कर सकेंगे और आपदा न्यूनीकरण और प्रबंधन में भी अपनी भूमिका निभाएंगे।
उत्तराखंड में लागू की गई योजना
गृह मंत्री श्री अमित शाह ने 25 जुलाई 2024 को इस योजना को मंजूरी दी थी, और यह एनडीएमए (NDMA) के निर्देशन में संचालित की जा रही है।
➡ यह योजना पूरे भारत के 315 जिलों में लागू की गई है, जिसके तहत 237,326 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
➡ इसके अतिरिक्त, 1300 पूर्व-प्रशिक्षित आपदा मित्रों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।
➡ उत्तराखंड के 11 जनपदों में यह योजना लागू की गई है, जहां 4310 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और 20 प्रशिक्षित आपदा मित्रों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया जाएगा।
स्वयंसेवकों के चयन की शर्तें
✅ आयु: 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
✅ उत्तराखंड के संबंधित जनपद का निवासी होना चाहिए।
✅ एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र या भारत स्काउट-गाइड में नामांकित होना अनिवार्य।
✅ न्यूनतम 7वीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए।
✅ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक।
✅ 50% महिला स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे महिलाओं की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।
प्रशिक्षण के बाद मिलने वाली सुविधाएं
प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी स्वयंसेवकों को उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से:
✔ प्रशस्ति पत्र (Certificate) प्रदान किया जाएगा।
✔ एक विशेष आपातकालीन किट दी जाएगी, जिसमें शामिल होंगे:
लाइफ जैकेट
सौर ऊर्जा से चार्ज होने वाली टॉर्च और आपातकालीन लाइट
सुरक्षा दस्ताने, चाकू, फर्स्ट एड किट, गैस लाइटर, सीटी
पानी की बोतल, मच्छरदानी, यूनिफॉर्म, बरसाती, गम बूट
सेफ्टी गॉगल्स, सेफ्टी हेलमेट, बहुउद्देश्यीय रस्सी
✔ तीन वर्षों के लिए लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस भी प्रदान किया जाएगा।
योजना का पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण प्रक्रिया
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने इस योजना के लिए विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसमें आपदा प्रबंधन, राहत और बचाव कार्यों की जानकारी दी जाएगी।
उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
उत्तराखंड एक आपदा-संवेदनशील राज्य है, जहां भूकंप, भूस्खलन, बादल फटने, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में समुदायों की भागीदारी और स्थानीय स्वयंसेवकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
श्री विनोद कुमार सुमन ने कहा,
"उत्तराखंड में इस योजना के लागू होने से स्थानीय समुदायों को आपदा प्रबंधन में सशक्त बनाया जाएगा। मैं सभी इच्छुक युवाओं से अपील करता हूं कि वे इस पहल का हिस्सा बनें और उत्तराखंड को आपदाओं से सुरक्षित रखने में अपना योगदान दें।"
इच्छुक युवा कैसे जुड़ सकते हैं?
जो युवा इस योजना का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे यूएसडीएमए (USDMA) या संबंधित युवा संगठनों (NCC, NSS, NYKS, भारत स्काउट-गाइड) से संपर्क कर सकते हैं।
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