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टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन: सर्वे और डीपीआर पूरी, 48,692 करोड़ की आएगी लागत; यातायात संभावना पर उठे सवाल, ट्रैन चलने से दूरस्थ जिलों—चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और बागेश्वर- को नया जीवन मिल सकता है।
देहरादून/नई दिल्ली। उत्तराखंड में रेल ढाँचे को लेकर केंद्र सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि राज्य में रेलवे परियोजनाओं के लिए बजट आवंटन पिछले एक दशक में 25 गुना बढ़ा है। वर्ष 2009-14 के दौरान जहाँ औसतन 187 करोड़ रुपये प्रति वर्ष मिलते थे, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 4,641 करोड़ रुपये हो गया है।
टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन: अगली बड़ी उम्मीद
लगभग 170 किलोमीटर लंबी टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन का सर्वे और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट में इस परियोजना की लागत 48,692 करोड़ रुपये आंकी गई है। हालाँकि यातायात संभावनाओं को लेकर सवाल उठे हैं, लेकिन यदि यह लाइन बनती है तो कुमाऊँ मंडल के दूरस्थ जिलों -चंपावत, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और बागेश्वर-को नया जीवन मिल सकता है।
प्रक्रिया अभी बाकी रेल मंत्री ने बताया कि डीपीआर बनने के बाद परियोजना की मंजूरी के लिए राज्य सरकार, नीति आयोग और वित्त मंत्रालय से परामर्श आवश्यक है। यही कारण है कि अभी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की जा सकती।
अब तक की प्रगति
1 अप्रैल 2025 तक राज्य में 216 किमी लंबाई की 3 नई रेल लाइनें कुल 40,384 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत हो चुकी हैं।
रणनीतिक और आर्थिक महत्व
सीमावर्ती जिलों तक रेल पहुँचने से सामरिक दृष्टि से लाभ।
पर्यटन और स्थानीय व्यापार में तेजी।
युवाओं के लिए रोजगार के अवसर।