🔊
ब्यानधूरा धाम: देवताओं की विधानसभा और आस्था का प्रमुख केंद्र
ब्यानधूरा धाम में तृतीय नवरात्री को होगा रात्रि जागरण
उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित ब्यानधूरा धाम को "देवताओं की विधानसभा" कहा जाता है। यह धाम न केवल चंपावत बल्कि उधमसिंह नगर, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और नैनीताल जिलों के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। यहां ऐड़ी देवता विराजमान हैं, जो भगवान शिव के 108 ज्योतिर्लिंगों में से एक माने जाते हैं।
पौराणिक महत्व और आस्था
इस मंदिर की विशेष मान्यता है कि यहां मांगी गई मन्नत पूरी होने पर धनुष-बाण चढ़ाने की परंपरा है। मंदिर परिसर में भारी संख्या में चढ़ाए गए धनुष-बाण इसकी पुष्टि करते हैं। कहा जाता है कि राजा ऐड़ी ने इस स्थान पर घोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप वे लोकदेवता के रूप में पूजे जाने लगे।
ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में अर्जुन ने अज्ञातवास के दौरान इस स्थान को निवास स्थल बनाया था। उन्होंने अपने गांडीव धनुष को मंदिर के समीप एक चोटी पर पत्थर के नीचे छिपाया था, जिसे केवल ऐड़ी देवता के अवतार ही उठा सकते हैं।
धार्मिक आयोजन और विशेष पर्व
ब्यानधूरा धाम में विभिन्न धार्मिक अवसरों पर भव्य मेलों और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति, चैत्र नवरात्र और माघी पूर्णिमा के अवसर पर यहां श्रद्धालु भारी संख्या में एकत्रित होते हैं। विशेष रूप से निसंतान महिलाएं व्रत रखकर पूजा करती हैं, जिससे उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है।
यात्रा मार्ग और प्राकृतिक सौंदर्य
ब्यानधूरा धाम तक पहुँचने के लिए विभिन्न मार्ग उपलब्ध हैं:
टनकपुर-सैनापानी मार्ग से 13 किमी पैदल यात्रा
कठोल गांव से 5 किमी पैदल यात्रा
अन्य पहाड़ी मार्गों से लंबी पैदल यात्रा
मंदिर से चारों ओर फैली पहाड़ियों और भाभर क्षेत्र की नदियों का मनोरम दृश्य इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और अधिक बढ़ा देता है।
ब्यानधूरा धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति, पौराणिक इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम भी है।
खबर से जुड़ी अन्य तस्वीरें: