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उत्तराखंड मानसून 2025- उत्तराखंड में मानसून का कहर - अब तक मानसून में 700 से अधिक मौतें, BRO को लगभग 100 करोड़ का नुकसान
देहरादून, 06 सितम्बर 2025।
उत्तराखंड में इस बार का मानसून भारी तबाही लेकर आया। जून से सितम्बर 2025 तक लगातार हुई बारिश, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं ने राज्य के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। अब तक 700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों परिवार बेघर हुए हैं और सैकड़ों मकान, पुल तथा सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
BRO को भारी नुकसान
बारिश और भूस्खलन से बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) को करीब ₹100 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा है। चमोली और उत्तरकाशी जिलों में कई राष्ट्रीय राजमार्ग व संपर्क मार्ग बह गए, जिससे सीमा क्षेत्रों में आवाजाही प्रभावित हुई। BRO ने आपातकालीन तौर पर मरम्मत और बहाली कार्य के लिए ₹60 करोड़ की तत्काल जरूरत जताई है।
सड़क और यातायात प्रभावित
गंगोत्री, बद्रीनाथ और यमुनोत्री हाईवे कई दिनों तक बंद रहे।
केदारनाथ मार्ग पर बार-बार भूस्खलन होने से तीर्थयात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
चारधाम यात्रा कई बार रोकी गई और अंततः सुधार के बाद पुनः शुरू की गई।
प्रभावित जनजीवन
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार:
हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि नष्ट हो गई है।
250 से अधिक गाँव आंशिक या पूरी तरह प्रभावित हुए।
हजारों लोग अस्थायी राहत शिविरों में रह रहे हैं।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि सितंबर माह के दूसरे सप्ताह तक देहरादून, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।
परंपरा और संस्कृति
कठिन परिस्थितियों के बीच भी राज्य की सांस्कृतिक परंपराएँ जीवित रहीं। उत्तरकाशी के डेयारा बुग्याल में आयोजित पारंपरिक बटर फेस्टिवल (अंधुड़ी उत्सव) इस बार सादगी से मनाया गया। ग्रामीणों ने सामूहिक प्रार्थना कर देवताओं से आपदा से मुक्ति की कामना की।
केदारनाथ हेली सेवाओं का किराया बढ़ा
बारिश और आपदा के चलते हवाई सेवाओं की लागत बढ़ गई है। इस साल केदारनाथ यात्रा के लिए हेलीकॉप्टर किराया लगभग 49% बढ़ाकर ₹11,000 से ₹14,000 तक कर दिया गया है।
निष्कर्ष
2025 का मानसून उत्तराखंड के लिए अब तक का सबसे भयावह सीजन साबित हुआ है। सैकड़ों मौतें, भारी वित्तीय नुकसान, टूटी सड़कें और विस्थापित लोग-इन सबने राज्य की नाजुक भौगोलिक स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। प्रशासन, सेना और स्थानीय लोग राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं, लेकिन प्रभावित क्षेत्रों को पूरी तरह सामान्य होने में अभी लंबा समय लग सकता है।