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चम्पावत जिला स्थापना दिवस आज: गौरवशाली इतिहास और नई उमंगों के साथ होगा भव्य आयोजन, पढ़े चम्पावत का इतिहास
चम्पावत।
उत्तराखंड के ऐतिहासिक नगर चम्पावत का जिला स्थापना दिवस इस वर्ष भी 15 सितम्बर को बड़े उत्साह और परंपरा के साथ मनाया जाएगा। चम्पावत, जो कभी कुमाऊँ की राजधानी रहा और अपने प्राचीन मंदिरों, वास्तुकला व सांस्कृतिक धरोहर के लिए विश्व प्रसिद्ध है, आज भी अपने गौरवशाली अतीत की झलक संजोए हुए है।
शनिवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में आगामी स्थापना दिवस की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। अपर जिलाधिकारी जयवर्धन शर्मा ने बताया कि सभी कार्यालयों, ब्लॉकों और तहसील भवनों को 14 से 16 सितम्बर तक एलईडी लाइटों से सजाया जाएगा। 15 सितम्बर की सुबह 10 बजे सभी कार्यालयों में शपथ ग्रहण कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसके तहत कर्मचारी जिले के विकास और जनसेवा के संकल्प को दोहराएंगे।
इस अवसर पर प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में विचार गोष्ठी होगी, जहां चम्पावत के इतिहास, सांस्कृतिक महत्व और विकास यात्रा पर चर्चा की जाएगी। उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया जाएगा और सूचना विभाग द्वारा महानुभावों के संदेश भी साझा किए जाएंगे।
स्थापना दिवस के मुख्य आकर्षण के रूप में शाम 6 बजे चम्पावत नगर के बस स्टेशन में आर्मी बैंड की धुनें गूंजेंगी। इसके लिए नगर पालिका परिषद और सूचना विभाग सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेंगे।
चम्पावत जिला, जो अपनी ऐतिहासिक धरोहर—बाणासुर का किला, बेतालदेव, बाराही मंदिर, नंदा देवी, ग्वाल देवता की परंपरा—के लिए जाना जाता है, आज आधुनिकता की राह पर अग्रसर है। जिला स्थापना दिवस इसी विरासत और प्रगति का संगम बनकर सामने आता है।
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???? चम्पावत का इतिहास (बॉक्स आइटम)
1. प्राचीन राजधानी
चम्पावत नगर कभी कुमाऊँ राज्य की राजधानी रहा।
10वीं से 16वीं शताब्दी तक कत्युरी राजाओं और बाद में चंद वंश का प्रमुख शासन केंद्र रहा।
चंद शासक सोमचंद ने चम्पावत को राजधानी बनाया।
2. सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर
यहां बाणासुर किला, बाराही मंदिर, नंदा देवी मंदिर, ग्वाल देव मंदिर, मानेश्वर मंदिर और बेतालदेव जैसे पौराणिक स्थल हैं।
लोक आस्था के देवता गोलू देवता (न्याय के देवता) का उद्भव स्थल भी यही माना जाता है।
3. गौरवशाली परंपरा
चम्पावत का नाम राजकुमारी चम्पावती के नाम पर पड़ा।
यहां कई बाराही सरोवर और किलों के अवशेष आज भी मौजूद हैं।
चम्पावत का उल्लेख स्कंद पुराण समेत कई ग्रंथों में मिलता है।
4. आधुनिक काल में
15 सितम्बर 1997 को उत्तर प्रदेश शासन द्वारा इसे नए जिले के रूप में स्थापित किया गया।
हर वर्ष 15 सितम्बर को जिला स्थापना दिवस मनाया जाता है।
वर्तमान में यह जिला उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिला है, जिसकी सीमा नेपाल से लगती है।