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चम्पावत का ब्यानधुरा मंदिर: आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम
चम्पावत। घने जंगलों और ऊँची चोटियों के बीच स्थित ब्यानधुरा मंदिर (Byandhura Mandir) धार्मिक आस्था और पौराणिक महत्व का प्रतीक माना जाता है। महाभारत काल से जुड़े इस मंदिर में आज भी लोहे के धनुष-बाण चढ़ाने की परंपरा जीवित है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, अज्ञातवास के समय पांडव यहां ठहरे थे और अर्जुन ने अपना गांडीव धनुष इसी स्थल पर छिपाया था। कहा जाता है कि इस धनुष को केवल ऐड़ी देवता ही उठा सकते हैं। यही कारण है कि भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति होने पर मंदिर में लोहे के धनुष-बाण अर्पित करते हैं।
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस मंदिर में सालभर श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन मकर संक्रांति, चैत्र नवरात्रि और माघी पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और मेले का आयोजन होता है। इस दौरान हजारों की संख्या में भक्त मंदिर पहुंचकर ऐड़ी देवता के दर्शन करते हैं।
हाल ही में मंदिर परिसर में प्राचीन मूर्तियां और पुरातात्विक अवशेष भी मिले हैं, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और बढ़ गई है। स्थानीय लोग इस धरोहर के संरक्षण और बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
ब्यानधुरा धाम न केवल धार्मिक स्थल है, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की विरासत और संस्कृति का भी अनमोल प्रतीक माना जाता है।
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