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उत्तराखंड के पहाड़ों में खेती का नया आयाम: मल्ला ख़तेड़ा के किसान भूपाल सिंह रावत की मिसाल
चंपावत, लोहाघाट:
क्या अब भी कोई कहेगा कि उत्तराखंड के पहाड़ों में खेती नहीं हो सकती?
मल्ला ख़तेड़ा गांव के भूपाल सिंह रावत ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है।
डिगरा गांव की लगभग 80 नाली जमीन पर उन्होंने साबित कर दिया कि हौसला और मेहनत से पहाड़ की कठिन जमीन भी सोना उगा सकती है।
खेती की खासियत:
हर मौसम में कुछ नया - आलू, गोभी, शिमला मिर्च
लाल, पीली और सफेद फूलगोभी
हरे, लाल और पीले शिमला मिर्च
पहाड़ी आलू का उत्पादन: 300-400 बोरे प्रति साल
बागवानी में भी कमाल:
सेब के 600 पेड़
कीवी के 70 पेड़
आड़ू 10, खुबानी 20, पुलम 25, पर्सिमन 10 पेड़
पर्सिमन यानी काकू, जापानी फल जो स्वास्थ्य के लिए गुणकारी माना जाता है।
कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ:
बंदर और जंगली सुअर फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं
पानी की भारी कमी - खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पाइप, मोटर और तालाब बनाए गए
हाल ही में क्षेत्रीय विधायक से हैंडपंप का आश्वासन
परिणाम और प्रभाव:-
लाखों की कमाई
गांव में रोजगार सृजन
पहाड़ की खेती में मिसाल
भूपाल सिंह रावत केवल किसान नहीं, बल्कि प्रेरणा हैं।
उनकी मेहनत और लगन यह सिखाती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो पहाड़ की जमीन भी सोना उगा सकती है।
नमन उनके हौसले और कार्य को!
खबर सूत्र: FB – Gaon Wala
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