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रजत जयंती का जश्न और विकास की सच्चाई: सड़क विहीन गांवों की दर्दनाक तस्वीर, मोबाइल की रोशनी में घायल को डोली में छह किमी दूर सड़क तक पहुंचाया, रजत जयंती पर मरथपला की पुकार -हमें सड़क चाहिए, जश्न नहीं
उत्तराखंड अपनी 25वीं वर्षगांठ मना रहा है, लेकिन यह दर्दनाक घटना इस जमीनी सच्चाई को उजागर करती है कि सीमांत के कई गांव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं।
नेता-मंत्री हवाई सेवाओं का लाभ ले रहे हैं, जबकि चंपावत जनपद के मटकांडा, बकोड़ा और मरथपला गांवों के लोग आज भी पैदल चलने को मजबूर हैं।
मरथपला से पंचायत मंच की दूरी लगभग 6 किलोमीटर है, और मंच से मुख्यालय 32 किलोमीटर दूर है। पैदल चलने में ढाई घंटे लगते हैं, जबकि एक घंटे का सफर वाहन से करना पड़ता है। अगर गांव सड़क से जुड़ जाता, तो यह दूरी ग्रामीणों के लिए राहत में बदल जाती।
शनिवार देर शाम करीब 7 बजे, ग्राम पंचायत बकोड़ा निवासी चंचल सिंह (48), मटकांडा के जगत सिंह (50) और उनका पुत्र अर्जुन सिंह मंच से पैदल घर लौट रहे थे। रास्ते में मरथपला गांव के पास चंचल सिंह का पैर फिसल गया और वे गहरी खाई में गिर गए। उन्हें बचाने की कोशिश में जगत सिंह भी नीचे जा गिरे। पीछे से आ रहे अर्जुन सिंह ने यह दृश्य देखा और गांव में जाकर मदद बुलाई।
गांव के धीरज सिंह सहित ग्रामीण टॉर्च और मोबाइल की रोशनी लेकर मौके पर पहुंचे। खोजबीन में पहले चंचल सिंह मिल गए जिन्हें मामूली चोटें आई थीं, लेकिन जगत सिंह गंभीर रूप से घायल पाए गए। सड़क न होने के कारण उन्हें अस्पताल तक पहुंचाना बड़ी चुनौती थी। ग्रामीणों ने डंडों और चादर की मदद से जुगाड़ की डोली बनाई और ढाई घंटे पैदल चलकर 6 किमी दूर मंच तक घायल को लाया।
मंच चौकी इंचार्ज मनोहर सिंह भी मौके पर पहुंचे और टीम के साथ सहयोग किया। इसके बाद 108 एंबुलेंस के माध्यम से रात 10:30 बजे घायल को चंपावत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के बाद अब उनकी स्थिति में सुधार बताया गया है।
कंधों पर विकास की उम्मीद
घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जब राज्य अपनी रजत जयंती पर विकास की उपलब्धियों का जश्न मना रहा है, तो ऐसे गांव अब भी पैदल चलने और डोली में मरीज ढोने को क्यों मजबूर हैं?
मंच-बकोड़ा सड़क का सर्वे पूरा हो चुका है लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है।
मरथपला, मटकांडा और बकोड़ा जैसे गांवों के लोग आज भी सड़क का सपना देख रहे हैं - शायद अगली वर्षगांठ तक यह सपना हकीकत बने।