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वेद-पुराणों में कुंभ और अर्द्धकुंभ की स्पष्ट परिभाषा दर्ज - कांग्रेस प्रदेश सचिव आनंद सिंह मेहरा
देहरादून। हरिद्वार के आगामी अर्द्धकुंभ को कुंभ घोषित करने की सरकार की कोशिश पर राजनीति तेज हो गई है। संत समाज में चल रही असहमति के बीच कांग्रेस प्रदेश सचिव आनंद सिंह मेहरा ने सरकार पर परंपराओं से खिलवाड़ और धार्मिक मान्यताओं के अपमान का आरोप लगाया है।
मेहरा ने कहा कि वेद-पुराणों में कुंभ और अर्द्धकुंभ की परिभाषाएँ स्पष्ट दर्ज हैं।
शास्त्रीय आधार बताते हुए उन्होंने कहा कि
कुंभ पर्व सूर्य, चंद्र और बृहस्पति के दुर्लभ खगोलीय योग पर आधारित दिव्य आयोजन है, जो केवल 12 वर्ष में ही संभव होता है।
वहीं अर्द्धकुंभ का अपना अलग महत्व और परंपरा है।
भारत की किसी भी परंपरा में अर्द्धकुंभ को कुंभ घोषित करने का आधार नहीं मिलता।
सरकार का यह कदम धार्मिक मर्यादा और सनातन परंपराओं का उल्लंघन है।
सरकार किस जल्दबाजी में है, और क्या छिपाना चाहती है - मेहरा
कांग्रेस नेता आनंद मेहरा ने सरकार पर सवाल उठाए -
सरकार आखिर इतनी उतावली क्यों है? क्या यह सिर्फ नाम बदलने का मामला है या इसके पीछे कुछ छिपाया जा रहा है?
उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल में हुए कुंभ घोटाले ने पहले ही उत्तराखंड की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में अर्द्धकुंभ को कुंभ घोषित करने की जिद सरकार की असफलताओं पर पर्दा डालने का प्रयास लगती है।
मेहरा ने कहा -
नाम बदलने से परंपरा नहीं बदलती, और प्रचार से पवित्रता नहीं बचती।
संत समाज की नाराजगी भी बढ़ी
मेहरा ने दावा किया कि संत समाज के कई प्रतिनिधियों ने भी सरकार के इस निर्णय पर असंतोष जताया है। उनका मत है कि
अर्द्धकुंभ का अपना गौरव है और उसे उसी नाम से जाना जाना चाहिए। धार्मिक आयोजन सरकार के प्रचार का माध्यम नहीं बन सकते।
मेहरा ने कहा -
धर्म आस्था और संस्कार का आधार है; इसे राजनीतिक लालच में तोड़ा-मरोड़ा नहीं जा सकता। सरकार चाहे जितना भी नामकरण करे, सत्य और शास्त्र अपनी जगह अडिग हैं।