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चंपावत-लोहाघाट रोपवे बनेगा विकास की नई उड़ान, 15 मिनट में तय होगा 13 किमी का सफर
चंपावत।
अब चंपावत से लोहाघाट की दूरी कुछ ही मिनटों में तय की जा सकेगी। मास्टर प्लान के तहत चंपावत से लोहाघाट तक रोपवे निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के साकार होने से जहां पर्यटन कारोबार को नई गति मिलेगी, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परिकल्पना के अनुरूप “आदर्श चंपावत” के निर्माण की दिशा में यह रोपवे प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित हो सकता है।
वर्तमान में जिला मुख्यालय चंपावत से लोहाघाट की दूरी लगभग 13 किलोमीटर है, जिसे सड़क मार्ग से तय करने में 30 से 40 मिनट का समय लगता है। प्रस्तावित 5.4 किलोमीटर लंबे रोपवे के माध्यम से यह सफर मात्र 15 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यह यात्रा न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि यात्रियों को पहाड़ों का विहंगम दृश्य भी देखने को मिलेगा।
यह रोपवे परियोजना ईको-फ्रेंडली होने के साथ-साथ परिवहन का एक आधुनिक और प्रभावी साधन साबित होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि वर्ष 2026 में इसके निर्माण कार्य की शुरुआत हो सकती है।
चंपावत से लोहाघाट के बीच प्रस्तावित रोपवे की डीपीआर शासन को भेज दी गई है। जिला प्रशासन से स्वीकृति के बाद इसे शासन स्तर पर अग्रसारित किया गया है। यह डीपीआर जिले की नोडल एजेंसी यूकॉस्ट (उत्तराखंड राज्य एवं प्रौद्योगिक विज्ञान परिषद) के निर्देशन में आवास विकास विभाग द्वारा तैयार की गई है।
एडीएम चंपावत केएन गोस्वामी ने बताया कि रोपवे परियोजना से क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा और पर्यटन व्यवसाय को नए पंख लगेंगे।
स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
प्रस्तावित रोपवे के निर्माण से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। एबट माउंट, कोली ढेक झील, मायावती आश्रम, सिद्ध मंदिर सहित आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की आवाजाही में इजाफा होगा। इससे होटल, होम-स्टे, टैक्सी सेवा, हस्तशिल्प और अन्य लघु व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
कुल मिलाकर, चंपावत-लोहाघाट रोपवे परियोजना न केवल आवागमन को आसान बनाएगी, बल्कि पर्यटन और रोजगार के माध्यम से जिले के समग्र विकास की नई राह खोलेगी।
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