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चंपावत वन प्रभाग में प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन का तीन दिवसीय निरीक्षण संपन्न इको-टूरिज्म और वनाग्नि नियंत्रण पर दिया जोर, जन सहयोग की अपील
चंपावत, 20 अप्रैल 2025 (सूवि):
उत्तराखंड के प्रमुख वन संरक्षक (HoFF) डॉ. धनंजय मोहन ने चंपावत वन प्रभाग के तीन दिवसीय दौरे के दौरान विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर फील्ड कार्यों की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने मॉडल क्रू स्टेशन (Incident Command Post) और बस्तिया पौधशाला का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान डॉ. मोहन ने फील्ड कर्मचारियों से सीधे संवाद करते हुए सजगता और तत्परता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। साथ ही, वनाग्नि नियंत्रण हेतु उपयोग में लाई जा रही फायर फाइटिंग तकनीकों और उपकरणों का भी अवलोकन किया।
इको-टूरिज्म में अपार संभावनाएं
प्रेस वार्ता में डॉ. मोहन ने कहा कि चंपावत वन प्रभाग में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएं हैं। धार्मिक, साहसिक और प्रकृति-आधारित पर्यटन को विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। मायावती क्षेत्र को बर्ड वॉचिंग के लिए उपयुक्त बताते हुए उन्होंने भविष्य में बर्ड फेस्टिवल आयोजित करने की योजना की जानकारी दी, जिससे स्थानीय होम स्टे व्यवसाय और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। पंचेश्वर क्षेत्र में एंग्लिंग पर्यटन को विकसित करने हेतु नदी-नालों के संरक्षण और महशीर मछली के ब्रीडिंग के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की योजना है।
वनाग्नि नियंत्रण में तकनीकी नवाचार
डॉ. मोहन ने बताया कि इस फायर सीजन में प्रदेश में कोई बड़ी वनाग्नि की घटना नहीं हुई, जो वन विभाग की सक्रियता और तकनीकी नवाचार का परिणाम है। उत्तराखंड फॉरेस्ट फायर ऐप और देहरादून स्थित इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के माध्यम से प्रदेश भर में सतत निगरानी की जा रही है।
विभाग ने मौसम विभाग के साथ एमओयू कर विशेष मौसम रिपोर्ट प्राप्त करनी शुरू की है, जिससे संभावित वनाग्नि का पूर्वानुमान कर त्वरित तैयारी संभव हो पाई है।
वनाग्नि में ज्वलनशील चीड़ पिरुल के प्रबंधन हेतु राज्य सरकार ने पिरुल की खरीद दर ₹3 से बढ़ाकर ₹10 प्रति किलो कर दी है, जिससे जंगलों में आग की घटनाएं कम होंगी और ग्रामीणों की आय भी बढ़ेगी।
जन सहयोग से होगा वन संरक्षण
डॉ. मोहन ने स्थानीय समुदाय से अपील की कि वे वनाग्नि रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर जंगल में आग लगाता है, तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दें। जनसहयोग से ही वनों की सुरक्षा संभव है।
वन विभाग द्वारा जनजागरूकता हेतु प्रचार-प्रसार वाहन संचालित किए जा रहे हैं और ग्रामीणों को सफल मॉडल्स का अध्ययन कराने के लिए एक्सपोजर विजिट्स कराई जा रही हैं। साथ ही जल संरक्षण और पौधारोपण परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
चंपावत वन प्रभाग की नवीन पहलें
प्रभागीय वनाधिकारी नवीन पंत ने बताया कि हर क्रू स्टेशन पर फायर फाइटर्स के लिए 3 लीटर क्षमता के वॉटर हाइड्रेशन बैग्स उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे फायर फाइटिंग के दौरान दोनों हाथ मुक्त रहते हैं। साल मिश्रित वनों में विशेष डिज़ाइन की गई फायर रेक का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे सूखे पत्तों की तेजी से सफाई संभव हो रही है।
इस निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य वन संरक्षक (कुमाऊं) डॉ. धीरज पांडे और एसडीओ नेहा सौन भी उपस्थित रहीं।