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चंपावत: आज से शुरू होगा किसानों की डिजिटल आईडी बनाने का महाअभियान, 28 फरवरी तक चलेंगे शिविर
चंपावत: भारत सरकार और उत्तराखंड राजस्व परिषद के निर्देशों के क्रम में चंपावत जिले में एग्रीस्टैक योजना के तहत किसानों की फार्मर रजिस्ट्री बनाने का कार्य 15 जनवरी 2026 (आज) से शुरू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की पहचान और उनकी भूमि के विवरण को डिजिटल करना है ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।
अपर जिलाधिकारी एवं नोडल अधिकारी (फार्मर रजिस्ट्री) कृष्ण नाथ गोस्वामी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह अभियान 28 फरवरी 2026 तक चलेगा।
क्या है फार्मर रजिस्ट्री और डिजिटल आईडी?
इस योजना के तहत प्रत्येक किसान की आधार नंबर पर आधारित एक यूनिक डिजिटल आईडी बनाई जाएगी। इस आईडी में किसान का व्यक्तिगत विवरण, उसकी उपलब्ध भूमि और बोई गई फसलों का पूरा ब्यौरा दर्ज होगा।
प्राथमिकता और समय सीमा
पहला चरण: प्रथम चरण में पीएम किसान सम्मान निधि (PM Kisan) के लाभार्थियों की रजिस्ट्री को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि उनकी आगामी किस्तों पर कोई असर न पड़े।
डेडलाइन: पीएम किसान लाभार्थियों का कार्य हर हाल में 28 फरवरी 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रक्रिया: यह कार्य वेब पोर्टल (ukfr.agristack.gov.in) और मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा।
कैसे होगा काम? (त्रि-स्तरीय व्यवस्था)
जिले में यह काम तीन स्तरों पर किया जाएगा:
ऑपरेटर (रजिस्ट्रेशन): कृषि, उद्यान, पशुपालन, सहकारिता, ग्राम्य विकास और पंचायती राज विभाग के कर्मचारी रजिस्ट्रेशन अधिकारी के रूप में घर-घर जाकर या कैंप में एंट्री करेंगे।
वेरीफायर (सत्यापन): राजस्व उपनिरीक्षक (पटवारी/लेखपाल) डाटा का सत्यापन करेंगे।
एप्रूवर (अनुमोदन): तहसीलदार और नायब तहसीलदार फाइनल अप्रूवल देंगे।
स्कोरिंग सिस्टम:
सिस्टम द्वारा डाटा की शुद्धता के आधार पर स्कोर दिया जाएगा:
Good Score (70-100): ऑटो अप्रूवल हो जाएगा।
Average Score (31-69): राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा सिंगल लेवल मैनुअल अप्रूवल होगा।
Poor Score (0-30): डबल लेवल मैनुअल अप्रूवल की आवश्यकता होगी।
किसानों के लिए जरूरी जानकारी
प्रशासन ने प्रत्येक राजस्व उपनिरीक्षक क्षेत्र में शिविर (Camps) लगाने के निर्देश दिए हैं। किसानों को इन शिविरों में निम्नलिखित दस्तावेज साथ लाने होंगे:
आधार कार्ड
आधार से लिंक मोबाइल नंबर
खतौनी (भूमि के दस्तावेज)
यदि कोई किसान शिविर में छूट जाता है, तो वह बाद में अपने क्षेत्रीय पटवारी से संपर्क कर अपनी रजिस्ट्री बनवा सकता है।
प्रशासन की तैयारी और बजट
शिविरों के आयोजन के लिए प्रति शिविर 15,000 रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह राशि तीन किस्तों (15%, 15% और 20% कार्य पूरा होने पर) में जारी की जाएगी।
इस राशि का उपयोग इंटरनेट (Wi-Fi), बिजली, कुर्सी-मेज, प्रचार-प्रसार और जलपान की व्यवस्था के लिए किया जाएगा।
जिले की सभी तहसीलों (चंपावत, लोहाघाट, पाटी, पूर्णागिरी, बाराकोट आदि) के लिए कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है और रोस्टर जारी कर दिया गया है।
अधिकारियों की जिम्मेदारी
जिला स्तर पर अपर जिलाधिकारी नोडल अधिकारी होंगे, जबकि मुख्य कृषि अधिकारी सहायक नोडल अधिकारी की भूमिका निभाएंगे।
तहसीलदार अपनी तहसील में कार्य पूर्ण कराने के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी होंगे।
प्रगति की समीक्षा मुख्य सचिव स्तर पर की जाएगी, जिसके लिए हर शुक्रवार को साप्ताहिक रिपोर्ट भेजनी होगी।
प्रशासन ने सभी किसानों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र में लगने वाले कैंपों में पहुंचकर अपनी डिजिटल आईडी अवश्य बनवाएं ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में भविष्य में कोई बाधा न आए।