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चम्पावत स्वास्थ्य विभाग को मिला स्वर्ग रथ, गरीबों व जरूरतमंदों को मृतकों को घर पहुंचाने में मिलेगी बड़ी सहायता, आपात स्थितियों में राहत
चम्पावत। जनपद चम्पावत के लिए एक बड़ी राहत भरी और मानवीय पहल के तहत स्वास्थ्य विभाग को ‘स्वर्ग रथ’ सुविधा प्रदान की गई है। अब दुर्घटना, आपातकालीन स्थिति अथवा आकाशीय आपदाओं के समय मृतकों को उनके घर तक सम्मानपूर्वक पहुंचाने में परिजनों को भारी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह सुविधा विशेष रूप से गरीब और असहाय परिवारों के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध होगी।
अब तक ऐसे मामलों में वाहन व्यवस्था, संसाधनों और कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर लोगों को काफी कठिनाइयों से गुजरना पड़ता था। कई बार परिजन आर्थिक तंगी और साधनों के अभाव में शव को ले जाने में असहाय नजर आते थे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनता की इस पीड़ा को समझते हुए मॉडल जिला चम्पावत में इस ऐतिहासिक सुविधा की शुरुआत की है। खास बात यह है कि वर्तमान में यह सुविधा उत्तराखंड के किसी अन्य जनपद में लागू नहीं है।
इस जनसमस्या को शासन स्तर तक मजबूती से पहुंचाने में जनपद के पूर्व जिलाधिकारी नवनीत पांडे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अपने जिलाधिकारी कार्यकाल के दौरान उन्होंने इस समस्या को नजदीक से देखा और इसके स्थायी समाधान के लिए प्रयास किए। वर्तमान में वे मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
वर्तमान जिलाधिकारी मनीष कुमार ने जनता दरबार के दौरान इस सुविधा की जानकारी आमजन को दी। घोषणा के बाद जनपदवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं पूर्व जिलाधिकारी नवनीत पांडे के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे चम्पावत के लिए एक ऐतिहासिक और संवेदनशील उपलब्धि बताया।
पूर्व घटनाओं ने उजागर की थी व्यवस्था की कमी
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मृतकों को घर पहुंचाने की कोई स्पष्ट और समर्पित व्यवस्था लंबे समय से नहीं थी। करीब छह माह पूर्व नैनीताल जनपद के रामनगर क्षेत्र में शव वाहन उपलब्ध न होने के कारण एक शव को ई-रिक्शा में पोस्टमार्टम हाउस ले जाने की घटना सामने आई थी, जिसने स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था और शव वाहनों की भारी कमी को उजागर किया था। इस घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
सामान्यतः 108 एम्बुलेंस सेवा आपातकालीन चिकित्सा सहायता के लिए होती है, लेकिन मृतकों को घर पहुंचाने के लिए अलग और सम्मानजनक व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, जिसमें सुधार की बड़ी गुंजाइश थी।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी जताई थी चिंता
छह माह पूर्व तत्कालीन वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर. राजेश कुमार ने भी इस समस्या पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा था कि कई बार मृत्यु के बाद मृतक के परिजनों को शव को घर ले जाने में भारी परेशानी उठानी पड़ती है, खासकर तब जब जनपद में मोर्चरी वाहन या शव वाहन उपलब्ध नहीं होता। उन्होंने निर्देश दिए थे कि ऐसी स्थिति में संबंधित अस्पताल प्रशासन अथवा सीएमओ स्तर से स्वयं संसाधन जुटाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि शव को सम्मानपूर्वक परिजनों तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था-
एक परिवार को और कष्ट न झेलना पड़े, यह हमारी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है।
मॉडल जिला की दिशा में संवेदनशील कदम
‘स्वर्ग रथ’ सुविधा की शुरुआत न केवल आपात परिस्थितियों में त्वरित और सम्मानजनक सहायता सुनिश्चित करेगी, बल्कि चम्पावत को वास्तविक रूप से मॉडल जिला बनाने की दिशा में एक मजबूत, मानवीय और संवेदनशील कदम साबित होगी।
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