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चार दशक बाद नैनीताल में सांप्रदायिक तनाव, मुस्लिम समुदाय के बुजुर्ग द्वारा बच्ची से दुष्कर्म के बाद भड़की भीड़ ने की तोड़फोड़
नैनीताल, उत्तराखंड: नैनीताल, जो अब तक शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और पर्यटन के लिए जाना जाता था, बुधवार रात एक अभूतपूर्व तनाव का गवाह बना। एक नाबालिग हिंदू लड़की के साथ कथित रूप से मुस्लिम समुदाय के एक बुजुर्ग द्वारा दुष्कर्म किए जाने के बाद शहर में भारी आक्रोश फैल गया। घटना के बाद बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और मल्लीताल थाना क्षेत्र में कई दुकानों में तोड़फोड़ कर दी गई।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना की जानकारी देर शाम पुलिस को मिली, जिसके बाद पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया गया। यह खबर फैलते ही कोतवाली के बाहर भीड़ जुटने लगी और देर रात तक मामला उग्र होता चला गया।
भीड़ ने गाड़ी पड़ाव बाजार में खड़े वाहनों को गिराया, दुकानों के सामने रखे सामान को बिखेर दिया, और कुछ घरों पर पथराव भी किया। कई घरों की खिड़कियों के शीशे टूट गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन हिंसा लगभग एक किलोमीटर क्षेत्र में फैल गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना अकेली नहीं है — हाल ही में बढ़ती आपराधिक घटनाओं ने समुदाय में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि देवभूमि में अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है और कुछ कट्टरपंथी तत्व समाज में जहर घोल रहे हैं।
हालांकि, मुस्लिम समुदाय की ओर से इस घटना पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई और कोई प्रतिहिंसा नहीं हुई, जिससे शहर में संभावित सांप्रदायिक दंगे की स्थिति टल गई।
यह घटना 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद नैनीताल में पहली बार इतना बड़ा तनाव लेकर आई है। इससे पहले भी देश में कई बड़ी सांप्रदायिक घटनाएं हुईं, लेकिन नैनीताल तक उनकी आंच नहीं पहुंची थी।
प्रशासन की सतर्कता और संयम जरूरी
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने शांति बनाए रखने की अपील की है और अफवाहों से दूर रहने की चेतावनी दी है।
क्या आगे बढ़ेगा सौहार्द का रास्ता?
नैनीताल जैसी शांत और सौहार्दपूर्ण जगह पर इस तरह की घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या प्रशासन इस आग को बुझा पाएगा? क्या समाज संयम और कानून के रास्ते पर रहेगा या सड़क पर न्याय की मांग बार-बार ऐसा ही कहर लाएगी?