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वरिष्ठ पत्रकार दीपक फुलेरा के विरुद्ध की गई कार्रवाई कही मुख्यमंत्री को बदनाम करने की साजिश तो नहीं है?
चंपावत। पत्रकार दीपक फुलेरा के विरुद्ध की गई कार्रवाई से अंतर्मन से सभी पत्रकार आहत है। पत्रकार के विरुद्ध यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब जिले में जिला पुलिस व प्रशासन, का पत्रकारों के साथ एक दूसरे के न केवल पूरक बने हुए है बल्कि वह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परिकल्पना के अनुसार मॉडल जिले के नियोजन एवं उत्तराखंड को एक ऐसा राज्य बनाने में पत्रकार अपनी लेखनी से रंग रहे है। जिससे हिमालयी राज्यों के लोग उनका अनुशरण कर सकें। यह घटना कहीं सीएम धामी व पत्रकारों के बीच बने मधुर संबंधों में खटास पैदा करने का तिगड़मी लोगों का कोई षड्यंत्र तो नहीं है? जिन्हें ऐसा स्वस्थ माहौल रास नहीं आ रहा है। केवल रसोई गैस के मुद्दे पर ही ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए सही तस्वीर सामने लाने पर जो कार्रवाई की गई है इसे दुर्भाग्यपूर्ण भी कहा जा सकता है। जिससे पत्रकार भड़क जाए। जहां तक पीड़ित दीपक फुलेरा का सवाल है वह ना केवल संवेदनशील मिजाज के वरिष्ठ पत्रकार हैं बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विकास यात्रा में उनके सहयोगी भी बने हुए हैं तथा उन्होंने हमेशा स्वस्थ पत्रकारिता को पनपाने में अपनी भूमिका निभाई है। सभी पत्रकार इस बात को जानना चाहते है कि वह कौन है? जिसने खिलती हुई फुलवारी में अंगारे बिछाने का काम किया है।पत्रकारों को इस बात की भी हैरानी है की रसोई गैस को लेकर चल रही मारामारी की तस्वीर प्रकाशित करने पर जब पत्रकार की कलम को "कुंठित" करने का प्रयास किया जाता है तो फिर तो उनकी हालात तो उस बगैर हथियार के पुलिस कर्मी की हो जाएगी जो आतंकवादियों का मुकाबला कर रहा होगा। इस मामले पर गंभीरता से चिंतन,मनन और मंथन करने की जरूरत है।