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1 अप्रैल से बदल जाएगा आर्थिक सिस्टम: टैक्स में राहत, लेकिन महंगाई का डबल झटका
नई दिल्ली। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ देश में कई बड़े आर्थिक बदलाव लागू होने जा रहे हैं। 1 अप्रैल 2026 से लागू हो रहे नए नियमों में आयकर, जीएसटी, बैंकिंग, पेंशन और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में बदलाव शामिल हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।
सबसे बड़ा बदलाव आयकर व्यवस्था में देखने को मिलेगा। छह दशक पुराने आयकर कानून की जगह अब ‘आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा। इसके तहत 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को टैक्स फ्री कर दिया गया है। साथ ही वेतनभोगियों के लिए 75 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन जारी रहेगा।
जीएसटी 2.0: कुछ राहत, कुछ बोझ-
नई जीएसटी व्यवस्था में टैक्स स्लैब को सीमित कर दिया गया है। स्वास्थ्य बीमा, जीवन रक्षक दवाएं और बिना पैक वाले डेयरी उत्पाद टैक्स फ्री हो गए हैं। वहीं छोटे कार, एसी और टीवी सस्ते होंगे। दूसरी ओर तंबाकू, लग्जरी वाहन और ऑनलाइन गेमिंग पर 40% तक टैक्स लगाया गया है।
महंगाई का असर-
नए नियमों के साथ महंगाई का दबाव भी बढ़ेगा। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ गई है। इसके अलावा 900 से ज्यादा जरूरी दवाओं के दाम बढ़ाए गए हैं। वाहन कंपनियों ने भी लागत बढ़ने के चलते कारों की कीमतों में इजाफा किया है।
बैंकिंग और डिजिटल सिस्टम में बदलाव-
बैंकिंग नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। एटीएम ट्रांजेक्शन लिमिट पार करने पर शुल्क बढ़ेगा। यूपीआई आधारित कार्डलेस निकासी भी अब फ्री ट्रांजेक्शन में शामिल होगी। डिजिटल पेमेंट के लिए 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
पेंशन और बीमा में राहत-
एनपीएस के तहत अब रिटायरमेंट पर 80% तक राशि एकमुश्त निकाली जा सकेगी। हेल्थ इंश्योरेंस में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत 5 साल बाद बीमा कंपनियां पुराने रोगों के आधार पर क्लेम खारिज नहीं कर सकेंगी।
यात्रा भी महंगी-
हाईवे पर टोल टैक्स बढ़ा दिया गया है। वहीं रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन के नियम सख्त कर दिए हैं, जिससे यात्रियों को अब पहले से ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।
31 मार्च की डेडलाइन अहम-
विशेषज्ञों के अनुसार, 31 मार्च से पहले टैक्स सेविंग निवेश, पीपीएफ/एनपीएस खाते सक्रिय रखना और अपडेटेड आईटीआर फाइल करना जरूरी है, अन्यथा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
निष्कर्ष-
नए वित्तीय नियम जहां एक ओर मध्यम वर्ग को टैक्स में राहत दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ती महंगाई घरेलू बजट पर दबाव डाल सकती है। ऐसे में समझदारी से वित्तीय योजना बनाना समय की जरूरत है।