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देशभर में UGC बिल 2026 के खिलाफ उठी आवाज, बिहार में सियासी घमासान तेज
पटना। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए UGC बिल 2026 को लेकर देशभर में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। खासतौर पर बिहार में इस बिल के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी के कोर वोटर माने जाने वाले सवर्ण समाज के युवा और छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं।
पटना समेत कई जिलों में प्रदर्शन
पटना, पूर्णिया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर सहित कई जिलों में मंगलवार को सवर्ण समाज के युवाओं ने प्रदर्शन किया। पटना के बाढ़ अनुमंडल में तो भाजपा कार्यकर्ता अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए, यहां तक कि पार्टी छोड़ने की धमकी भी दी गई।
इसी दिन भाजपा प्रदेश कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर पार्टी पदाधिकारी और प्रवक्ता जवाब देने से बचते नजर आए।
भाजपा की चुप्पी, बयान देने से परहेज
भाजपा के एक प्रवक्ता ने साफ कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर बोलने से मना किया गया है। वहीं भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा कि
यह बिल सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर लाया गया है, किसी के साथ अन्याय नहीं होगा।
JDU ने अपनाया अलग रुख
एनडीए की प्रमुख सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इस बिल पर भाजपा से अलग रुख अपनाया है।
जदयू के मुख्य प्रवक्ता और एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि
“किसी भी वर्ग की उपेक्षा लोकतंत्र के लिए घातक हो सकती है। कोई भी कानून सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहिए।”
उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भाजपा के पदाधिकारियों ने इन नियमों के विरोध में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
छात्रों का आरोप - काला बिल
पटना के दिनकर गोलंबर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र नेताओं सौरव कुमार, विशाल और राकेश कुमार ने इस बिल को
सवर्ण विरोधी और जातिगत विभाजन बढ़ाने वाला काला कानून बताया।
छात्रों का आरोप है कि मोदी सरकार वोट बैंक की राजनीति के तहत सामान्य वर्ग की अनदेखी कर रही है।
क्या है नया UGC बिल 2026?
यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस 2026 लागू किया है।
यह नियम 2012 के पुराने विनियमों की जगह लेता है।
मुख्य प्रावधान:
हर उच्च शिक्षण संस्थान में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) की स्थापना
जाति, धर्म, लिंग, दिव्यांगता, जन्म स्थान आदि के आधार पर भेदभाव रोकने का दावा
कमजोर वर्गों की शिकायतों की सुनवाई की व्यवस्था
हालांकि, विरोध कर रहे छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि दंडात्मक प्रावधानों की अस्पष्टता के कारण नियमों का दुरुपयोग हो सकता है।
निष्कर्ष-
UGC बिल 2026 को लेकर विरोध अब सिर्फ छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। बिहार में भाजपा के अपने समर्थकों का सड़क पर उतरना और जदयू का अलग रुख अपनाना, आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।