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गंगोलीहाट के 17 आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी घोषित करने की उठी मांग, राज्यपाल को भेजा गया पत्र
गंगोलीहाट। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने वाले गंगोलीहाट विधानसभा क्षेत्र के 17 आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी घोषित किए जाने की मांग तेज हो गई है। इस संबंध में महामहिम राज्यपाल को एक ज्ञापन प्रेषित कर मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड राज्य का गठन हजारों आंदोलनकारियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान का परिणाम है। राज्य गठन के बाद सरकार द्वारा अनेक आंदोलनकारियों को चिह्नित कर राज्य आंदोलनकारी का दर्जा दिया गया, लेकिन कई ऐसे लोग अब भी इस मान्यता से वंचित हैं जिन्होंने आंदोलन में सक्रिय योगदान दिया था।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि 20 अगस्त 1994 को गंगोलीहाट क्षेत्र में राज्य आंदोलन के दौरान समाजवादी पार्टी के तत्कालीन जिलाध्यक्ष को आंदोलन के समर्थन में बयान देने के लिए कथित रूप से दबाव बनाने के आरोप में 18 आंदोलनकारियों के खिलाफ थाना बेरीनाग में धारा 147, 385, 452 एवं 504 भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मुकदमा "बनाम श्यामाचरण उप्रेती एवं 17 अन्य" के नाम से पंजीकृत हुआ था।
ज्ञापन के अनुसार इस घटना की निंदा तत्कालीन उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी प्रस्ताव पारित कर की गई थी। बाद में 12 अक्टूबर 1995 को उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर अभियोजन विभाग द्वारा यह मुकदमा वापस ले लिया गया था, जिससे स्पष्ट होता है कि मामला उत्तराखंड राज्य आंदोलन से संबंधित था।
पत्र में यह भी बताया गया है कि उक्त मुकदमे के मुख्य आरोपी श्यामाचरण उप्रेती को पूर्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य आंदोलनकारी घोषित किया जा चुका है, जबकि उनके साथ नामजद अन्य 17 आंदोलनकारियों को अभी तक यह मान्यता नहीं मिल सकी है।
राज्यपाल से अनुरोध किया गया है कि मामले का संज्ञान लेते हुए शेष 17 आंदोलनकारियों को भी राज्य आंदोलनकारी घोषित करने की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण कराई जाए। 7 जून 2026 को भेजे गए इस पत्र पर मुकेश रावल, प्यारे लाल साह, राजेंद्र सिंह बिष्ट, भगवत लाल साह, दिनेश सिंह बिष्ट, रणजीत सिंह, शंकर लाल साह सहित कई लोगों के हस्ताक्षर हैं।