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गंगोलीहाट को पृथक जनपद बनाने की मांग तेज, राज्यपाल को भेजा गया ज्ञापन।
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के तहत आने वाले गंगोलीहाट क्षेत्र को एक स्वतंत्र जिला (पृथक जनपद) घोषित करने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक ज्ञापन में गंगावली जिला बनाओ संघर्ष समिति ने प्रदेश के महामहिम राज्यपाल को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर क्षेत्र की इस पुरानी और जायज मांग पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है।
ज्ञापन में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया गया है कि सरयू और पूर्वी रामगंगा नदियों के बीच बसा गंगोलीहाट (गंगावली) क्षेत्र आजादी के सात दशक बीत जाने और उत्तराखंड राज्य गठन के इतने वर्षों बाद भी बुनियादी विकास की किरणों से अछूता है। क्षेत्र की जनता आज भी चिकित्सा, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रही है। लोगों को तहसील मुख्यालयों तक पहुंचने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता है, जो कि जिला मुख्यालय से औसतन 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
संघर्ष समिति ने ध्यान आकर्षित किया है कि पूर्व में चम्पावत और बागेश्वर जैसी छोटी प्रशासनिक इकाइयों का गठन कर उन्हें विकास की मुख्य धारा से जोड़ा गया था। इसके विपरीत, विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले गंगोलीहाट क्षेत्र (जिसमें गंगोलीहाट, बेरीनाग और गनाई गंगोली तहसीलें शामिल हैं) का क्षेत्रफल नवसृजित जनपदों से कहीं अधिक होने के बावजूद इसके विकास के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसी उपेक्षा का नतीजा है कि विगत दशकीय जनगणना के अनुसार यहां के 22 से अधिक गांवों के लोग पलायन कर चुके हैं और यह सिलसिला अब भी जारी है।
ज्ञापन के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि 1.5 लाख से अधिक आबादी वाला यह क्षेत्र जिला गठन के सभी मानकों को पूरी तरह से पूरा करता है। गंगोलीहाट विधानसभा क्षेत्र की मतदाता संख्या अन्य जिलों के कई विधानसभा क्षेत्रों से कहीं अधिक है। प्राकृतिक सौंदर्य और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इस क्षेत्र में पर्यटन और उद्योग की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें केवल एक पृथक प्रशासनिक इकाई बनाकर ही साकार किया जा सकता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2011 में भी गंगोली क्षेत्र के लोगों ने इस मांग को लेकर दो महीने तक तहसील गंगोलीहाट में धरना-प्रदर्शन किया था, जिसके बाद तत्कालीन उत्तराखंड सरकार ने गंगोलीहाट को नए जिलों की सूची में शामिल किया था। हालांकि, वर्तमान सरकार द्वारा नए जिलों की सूची में गंगोली जिले का नाम न शामिल किए जाने से क्षेत्र के लोगों में भारी निराशा और आक्रोश व्याप्त है। गंगावली जिला बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष गणेश सिंह बोरा और स्थानीय व्यापार मंडल के पदाधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित इस ज्ञापन में राज्यपाल से जनता की भावनाओं और क्षेत्र के पिछड़ेपन को देखते हुए तुरंत गंगोली को पृथक जिला घोषित करने की मांग की गई है।