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चंपावत की चमक पर दाग लगाने की साजिश बर्दाश्त नहीं, मॉडल जिले की पहचान को चुनौती दे रहे असामाजिक तत्व, विकास और पर्यटन की छवि पर पड़ सकता है असर।
चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परिकल्पना के अनुरूप चंपावत आज उत्तराखंड के एक आदर्श और मॉडल जिले के रूप में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। पर्यटन, ईको-टूरिज्म, आधारभूत विकास, प्रशासनिक दक्षता और जनसुविधाओं के क्षेत्र में जिले ने प्रदेशभर में अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन हाल के दिनों में सामने आई कुछ आपराधिक और अमानवीय घटनाओं ने इस सकारात्मक छवि को आघात पहुंचाने का प्रयास किया है।
एक छात्रा से जुड़े प्रकरण को लेकर फैलाई गई भ्रामक चर्चाएं हों या फिर एक गरीब टैक्सी चालक को जूतों की माला पहनाकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने तथा उसका मोबाइल छीनने जैसी शर्मनाक घटना, ऐसे कृत्य सभ्य समाज को शर्मसार करने वाले हैं। इन घटनाओं की जितनी निंदा की जाए, उतनी कम है। यह केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं, बल्कि चंपावत की उस सामाजिक संस्कृति पर भी प्रश्नचिह्न हैं जिसकी पहचान शांति, सौहार्द और मानवीय मूल्यों से रही है।
चंपावत के लोग अपनी सादगी, आत्मीयता और सहयोगी स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि आखिर कौन लोग हैं जो अपनी संकीर्ण मानसिकता और गैर-जिम्मेदार हरकतों से जिले की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी पर्यटन क्षेत्र की सफलता वहां की सामाजिक छवि, सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय संस्कृति पर निर्भर करती है। प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और शांत वातावरण के कारण चंपावत देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। ऐसे में यदि अपराध और अराजकता से जुड़ी घटनाएं लगातार सुर्खियों में रहेंगी तो इसका सीधा प्रभाव पर्यटन उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
आवश्यकता केवल कानूनी कार्रवाई की नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी ऐसे तत्वों के प्रति शून्य सहिष्णुता का वातावरण तैयार करने की है। अपराधियों को समाज में किसी प्रकार की स्वीकार्यता नहीं मिलनी चाहिए। साथ ही सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों की पुष्टि के अफवाहें और सनसनी फैलाने की प्रवृत्ति पर भी अंकुश लगना जरूरी है, क्योंकि इससे जिले की सकारात्मक छवि अनावश्यक रूप से प्रभावित होती है।
निश्चित रूप से पुलिस अपना दायित्व निभा रही है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि कानून का ऐसा भय स्थापित हो कि अपराधी अपराध करने से पहले कई बार सोचने को मजबूर हों। पुलिस का इकबाल और जनता का विश्वास ही किसी भी जिले की कानून व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होता है। दूसरी ओर, चंपावत प्रशासन अपनी त्वरित और संवेदनशील कार्यशैली के कारण लगातार सराहना बटोर रहा है। आपदा, दुर्घटना या किसी भी आपात स्थिति में राहत और सहायता पहुंचाने की प्रशासन की तत्परता प्रदेश के लिए उदाहरण बनती जा रही है। पीड़ितों तक तत्काल मदद पहुंचाने की व्यवस्था प्रशासन की जवाबदेही और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
ऐसी घटनाएं चंपावत की सकारात्मक पहचान को चुनौती देती हैं - जिलाधिकारी
चम्पावत। जिलाधिकारी मनीष कुमार का कहना है कि चंपावत के लोग स्वभाव से शांत, रचनात्मक और सकारात्मक सोच वाले हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में मॉडल जिले के रूप में विकसित हो रहा चंपावत आज अनेक क्षेत्रों में नई मिसाल कायम कर रहा है। जिले की उपलब्धियां अन्य हिमालयी जनपदों और राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे सकारात्मक माहौल के बीच होने वाली आपराधिक घटनाएं स्वाभाविक रूप से लोगों को आहत करती हैं और जिले की बेहतर पहचान को चुनौती देती हैं। इसलिए विकास और शांति के इस सफर को बदनाम करने वाले तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है। समाज और प्रशासन को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि चंपावत की पहचान उसके विकास, संस्कृति, सौहार्द और प्राकृतिक सौंदर्य से हो, न कि अपराध और अव्यवस्था से।
फोटो - जिलाधिकारी मनीष कुमार।