🔊
चम्पावत की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई उड़ान, स्क्रीन प्रिंटिंग और फूड प्रोसेसिंग का मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण, यूकॉस्ट के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में महिलाओं ने सीखी जूट बैग स्क्रीन प्रिंटिंग और प्लम से जैम, जूस व चटनी बनाने की तकनीक, स्वरोजगार के नए रास्ते खुले।
चम्पावत। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा महिला प्रौद्योगिकी केंद्र, चम्पावत में स्क्रीन प्रिंटिंग एवं फूड प्रोसेसिंग विषयों पर तीन दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। 18 से 20 जून तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में जनपद के विभिन्न गांवों से आई महिला उद्यमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और नई तकनीकी दक्षताएं हासिल कीं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए देवेंद्र सिंह ने प्रतिभागियों, विशेषज्ञों एवं अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने अपने संदेश में कहा कि महिलाओं को उद्यमिता एवं स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से चम्पावत में स्थापित महिला प्रौद्योगिकी केंद्र लगातार कौशल विकास कार्यक्रम संचालित कर रहा है। उन्होंने कहा कि जूट बैग पर स्क्रीन प्रिंटिंग का प्रशिक्षण महिलाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रदान करेगा, वहीं स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।
प्रो. पंत ने बताया कि चम्पावत क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध प्लम (आलूबुखारा) के मूल्य संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को प्लम से जैम, जूस और चटनी जैसे उत्पाद तैयार करने की आधुनिक तकनीक सिखाई गई, जिससे वे स्थानीय उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य पर बेच सकें और अपनी आय बढ़ा सकें।
कार्यक्रम में बृजेश कुमार आगरी ने महिला उद्यमियों को निरंतर अभ्यास के माध्यम से अपने कौशल को और अधिक विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिला प्रौद्योगिकी केंद्र महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रहा है।
ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुईं डॉ. प्रियंका अधिकारी ने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि कौशल और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएं स्वरोजगार के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर सकती हैं और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन सकती हैं।
फूड प्रोसेसिंग विशेषज्ञ एस.पी. नौटियाल ने प्रतिभागियों को प्लम आधारित उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। उन्होंने गुणवत्ता नियंत्रण, आकर्षक पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा मार्केटिंग के गुर भी साझा किए। वहीं स्क्रीन प्रिंटिंग विशेषज्ञ दिनेश ने महिलाओं को जूट बैग पर विभिन्न डिजाइनों की स्क्रीन प्रिंटिंग का प्रशिक्षण दिया, जिसमें प्रतिभागियों ने स्वयं अभ्यास कर तकनीक को समझा।
तीन दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की और स्वरोजगार की दिशा में नई संभावनाओं को जाना। समापन अवसर पर दीपांशु चंद्र ने सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता पर प्रसन्नता जताई।
फोटो - चम्पावत स्थित महिला प्रौद्योगिकी केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान जूट बैग पर स्क्रीन प्रिंटिंग का अभ्यास करतीं महिला प्रतिभागी तथा प्लम से मूल्य संवर्धित उत्पाद बनाने की तकनीक सीखती महिलाएं।