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45% जल स्रोत खत्म, पहाड़ का भविष्य खतरे में, पाटी में बोले राजशेखर जोशी, ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने पर जताई चिंता, कहा- केवल योजनाओं से नहीं, जमीनी काम से बचेगा पहाड़।
लोहाघाट। उत्तराखंड सरकार के पूर्व थिंक-टैंक सेतु आयोग के निवर्तमान उपाध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. राजशेखर जोशी ने पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से गहराते जल संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। नगर पंचायत पाटी में आयोजित विचार गोष्ठी में उन्होंने कहा कि राज्य के लगभग 45 प्रतिशत पारंपरिक जल स्रोत सूख चुके हैं, जबकि शेष स्रोत भी लगातार संकट की ओर बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और जल स्रोतों का समाप्त होना आने वाले समय में पहाड़ों के अस्तित्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो पर्वतीय क्षेत्रों का सामाजिक और आर्थिक ढांचा प्रभावित होगा।
जोशी ने कहा कि पहाड़ों के विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल कागजी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उत्तराखंड में कृषि और बागवानी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें व्यवस्थित तरीके से विकसित करने की आवश्यकता है।
मानव संसाधन विकास पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा और आंतरिक क्षमताओं की समय रहते पहचान कर उन्हें सही दिशा देना आवश्यक है। क्षमता और संवेदनशीलता का संतुलन ही एक मजबूत समाज और विकसित राज्य की नींव रख सकता है।
पाटी ब्लॉक के किमाड़ गांव निवासी जोशी आईआईटी से कंप्यूटर साइंस स्नातक हैं और रिलायंस, टाटा तथा आदित्य बिड़ला समूह जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में करीब 35 वर्षों तक शीर्ष पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), साइबर सुरक्षा, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और पब्लिक पॉलिसी के क्षेत्र में उनकी विशेषज्ञता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
गोष्ठी में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी स्थानीय विकास, जनकल्याण और भविष्य की योजनाओं को लेकर अपने सुझाव रखे।
फोटो - पाटी में आयोजित विचार गोष्ठी को संबोधित करते पूर्व सेतु आयोग उपाध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञ राजशेखर जोशी।