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10 से 15 हजार में बिकती थी मौत, कब्रिस्तान बना कारोबार का केंद्र बनभूलपुरा में फर्जीवाड़े की परतें खुलीं: मृत दिखाकर बने प्रमाणपत्र, पार्षदों की भूमिका पर उठे सवाल
बनभूलपुरा में प्रशासनिक सत्यापन अभियान के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। एक ही इलाके में अपराधी को मृत दिखाकर प्रमाणपत्र बनवाना, 10 घरों में 153 लोगों का बिना सत्यापन के रहना, बंद दुकानों में छिपकर रहना और बाहर से ताले लगे घरों में लोगों की मौजूदगी ने प्रशासन को चौकन्ना कर दिया है। मामले में कुछ स्थानीय पार्षदों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मृत दिखाकर बनाई पहचान, कब्रिस्तान कमेटी के सदस्य गिरफ्तार
जेल से जमानत पर छूटे अफजाल अली ने खुद को नगर निगम रिकॉर्ड में मृत दिखाए जाने की शिकायत की है। अफजाल का आरोप है कि कब्रिस्तान कमेटी के सदस्य इकबाल अंसारी और उसके बेटे तनवीर उर्फ सादिक ने 15 हजार रुपये लेकर झूठा प्रमाणपत्र बनवाया और उसे कब्रिस्तान में दफन दिखाया। इसी झूठे दस्तावेज के आधार पर हल्द्वानी नगर निगम ने उसका मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिया।
थाना प्रभारी नीरज भाकुनी के अनुसार, जांच में सामने आया है कि उक्त पिता-पुत्र ने अफजाल के पिता सैय्यद शाने अली और पूर्व पार्षद के बेटे की मौत को भी बनभूलपुरा में दफन दिखाकर झूठे प्रमाणपत्र बनवाए, जबकि उनकी मृत्यु और दफन कहीं और हुई थी।
10 से 15 हजार में बिकती थी ‘मौत’, कब्रिस्तान बना कारोबार का केंद्र
पुलिस का कहना है कि ये आरोपी प्रत्येक फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के बदले 10 से 15 हजार रुपये लेते थे। अफजाल की मां से 15 हजार रुपये वसूले गए थे।
पार्षदों की भूमिका संदिग्ध, प्रशासन से उठी जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और जागरूक समूहों ने आरोप लगाया है कि कुछ पार्षद न केवल इन गतिविधियों से अवगत थे, बल्कि फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेज बनवाने में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग कर रहे हैं। आरोप यह भी है कि वही लोग इन फर्जीवाड़ा करने वालों को पुलिस से बचा रहे हैं। मांग की जा रही है कि जहां-जहां ये लोग पाए जा रहे हैं, वहां के पार्षदों से भी सख्त पूछताछ की जाए और यह पता लगाया जाए कि वे इस सब से अनजान कैसे रह सकते हैं।
प्रशासन की सख्ती, जांच के दायरे में कई लोग
एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर चल रहे सत्यापन अभियान में फर्जी दस्तावेजों का भंडाफोड़ हुआ है। अब तक कई फर्जी आधार कार्ड, मृत्यु प्रमाणपत्र और जमीन की रजिस्ट्री के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कांडपाल के अनुसार, मृत्यु प्रमाणपत्र उस कागज के आधार पर जारी किया गया जो कब्रिस्तान कमेटी से मिला था।
बनभूलपुरा में हो रही इस तरह की गतिविधियाँ सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करती हैं। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह साजिशें सामाजिक और सुरक्षा के लिहाज से गंभीर संकट बन सकती हैं।
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