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गोरखनाथ धाम: चंपावत की आध्यात्मिक धरोहर, आस्था और परंपरा का केंद्र, सतयुग से जल रही है धूनी, संतान प्राप्ति के लिए श्रद्धा का केंद्र, निःसंतानों को यहाँ से मिलता है संतान का आशीर्वाद
चंपावत।
उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित गोरखनाथ धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह नाथ संप्रदाय की परंपराओं, आध्यात्मिक साधना और क्षेत्रीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक भी है। चंपावत-तामली मोटर मार्ग पर स्थित यह धाम समुद्र तल से ऊंची एक पर्वत चोटी पर बसा है और जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
सतयुग से जल रही है धूनी, संतान प्राप्ति के लिए श्रद्धा का केंद्र
गोरखनाथ धाम की सबसे विशेष बात यह है कि यहां सतयुग से अखंड धूनी जल रही है। ऐसी मान्यता है कि निःसंतान दंपति यहां आकर श्रद्धा से साधना करें तो उन्हें संतान की प्राप्ति होती है। यहां हर शुभ कार्य से पहले क्षेत्र की पहली उपज और पहला दूध गोरखनाथ जी को अर्पित किया जाता है।
400 साल पुराना ऐतिहासिक घंटा और चंद राजाओं की आस्था
धाम में एक 400 वर्ष पुराना घंटा है, जिसे चंद राजाओं द्वारा चढ़ाया गया था। यह मंदिर नाथ संप्रदाय के साधुओं द्वारा स्थापित किया गया था और यहां गुरु गोरखनाथ को गो-रक्षक और तपस्वी दोनों रूपों में पूजा जाता है।
देश-विदेश से आते हैं श्रद्धालु
धाम की आध्यात्मिक ख्याति के कारण देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन और साधना के लिए पहुंचते हैं। मंदिर तक वाहन से मंच तक जाने के बाद लगभग दो किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है, जो स्वयं एक तप की तरह मानी जाती है।
महंत योगी रामनाथ जी के नेतृत्व में हो रहा विकास
धाम के महंत योगी रामनाथ जी के आने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वे धाम के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और भौतिक विकास के लिए लगातार प्रयासरत हैं। स्थानीय स्तर पर धाम को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की भी योजनाएं बनाई जा रही हैं।
यदि आप इन दिनों गोरखनाथ धाम की यात्रा करना चाहते हैं, तो महंत रामनाथ जी से संपर्क कर सकते हैं। वे श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्हाट्सऐप और कॉल के माध्यम से उपलब्ध रहते हैं।
संपर्क: +91 98559 51008
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