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टीईटी की अनिवार्यता से राहत की मांग, सीएम धामी से रिटर्न गिफ्ट की अपील।
सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे शिक्षकों पर नई परीक्षा का दबाव न डालने की मांग, वर्षों की सेवा, अनुभव और विभागीय प्रशिक्षण को शिक्षक की योग्यता का आधार मानने की उठी आवाज।
लोहाघाट। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन पर मिशन शिक्षण संवाद टीम उत्तराखंड ने प्रदेश के हजारों सेवारत शिक्षकों से जुड़ी टीईटी की समस्या के समाधान की मांग उठाई है। संगठन के संस्थापक एवं पूर्व राज्य प्रभारी लक्ष्मण सिंह मेहता ने मुख्यमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए इसे शिक्षकों की ओर से ‘रिटर्न गिफ्ट’ के रूप में टीईटी समस्या के समाधान की मांग बताया।
लक्ष्मण सिंह मेहता का कहना है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पूर्व वर्ष 2010 से पहले नियुक्त ऐसे शिक्षक, जो करीब 30 से 35 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं, उनसे अब टीईटी परीक्षा की अनिवार्यता वरिष्ठ शिक्षकों के सम्मान और सेवा-शर्तों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने सरकार से लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए पुनः टीईटी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करते हुए विधानसभा से विधेयक पारित कर राहत देने की मांग की। साथ ही वर्षों की सेवा, विभागीय प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव को शिक्षक की योग्यता का महत्वपूर्ण आधार मानने की अपील की।
संगठन ने मांग की कि सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी व्यवस्था का स्पष्ट और न्यायसंगत समाधान निकाला जाए तथा सेवानिवृत्ति के नजदीक पहुंच चुके शिक्षकों पर नई परीक्षा का दबाव न डाला जाए। जिन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू नियमों के तहत हुई थी, उनकी सेवा-शर्तों पर बाद में प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए सरकार स्पष्ट नीति बनाए।
मिशन शिक्षण संवाद टीम ने प्रभावित शिक्षकों के लिए विभागीय टीईटी, विशेष अवसर अथवा अन्य वैधानिक विकल्प तलाशने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि समाधान ऐसा होना चाहिए, जिसमें विद्यार्थियों की शिक्षा, शिक्षक का सम्मान और सेवा-सुरक्षा—तीनों के बीच संतुलन कायम रहे।
फोटो - लक्ष्मण सिंह मेहता