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दूसरी राजभाषा संस्कृत को शिक्षा में मिले अंग्रेजी के समान महत्व।
दूसरी राजभाषा संस्कृत को शिक्षा में मिले अंग्रेजी के समान महत्व।
दो दिवसीय संस्कृत ज्ञान प्रतियोगिता संपन्न, दूरस्थ विद्यालयों के बच्चों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल।
लोहाघाट। संस्कृत भाषा के संरक्षण और संवर्धन के लिए आयोजित दो दिवसीय संस्कृत ज्ञान प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण के साथ संपन्न हो गई। उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के तत्वावधान में हुए इस आयोजन में संस्कृत साहित्य, भारतीय संस्कृति और प्रकृति का सुंदर संगम देखने को मिला। छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों ने साबित किया कि उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन मिलने पर दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी भी संस्कृत के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से उत्तराखंड संस्कृत अकादमी ने वर्ष 2008 में इस प्रकार की प्रतियोगिताएं शुरू की थीं। वर्ष 2016 से प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार देने की व्यवस्था शुरू होने के बाद बच्चों में प्रतियोगिता के प्रति आकर्षण और बढ़ा। दो दिनों तक विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने संस्कृत की अलग-अलग विधाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों की गुणवत्ता ने निर्णायकों को भी प्रभावित किया।
कार्यक्रम में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार में शिक्षकों की भूमिका विशेष रूप से उभरकर सामने आई। हाईस्कूल स्तर तक संस्कृत के नियमित शिक्षक पदों की कमी के बावजूद हिंदी के शिक्षक इस भाषा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। जीआईसी पुल्ला केँँं क्रिश्चियन अंग्रेजी भाषा के शिक्षक पारितोष जसवंत सिंह ने संस्कृत साहित्य के नौ रसों से जुड़े पात्रों का शानदार प्रदर्शन कर भाषा के प्रति अपनी रुचि और समर्पण का परिचय दिया। जिला विशेष रूप से सम्मानित किया गया श्री सिंह पिछले 5 वर्षों से अपने विद्यालय के बच्चों को प्रतियोगिता के लिए तैयार करते आ रहे हैं।
आयोजन के दौरान संस्कृत शिक्षा की वर्तमान व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं के अनुसार माध्यमिक स्तर पर संस्कृत शिक्षकों के पदों का अभाव और इंटरमीडिएट में संस्कृत को अंग्रेजी के विकल्प के रूप में रखा जाना इस भाषा के विकास में चुनौती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की दूसरी राजभाषा होने के कारण संस्कृत को शिक्षा में पर्याप्त स्थान और संसाधन मिलने चाहिए, ताकि विद्यार्थी इसे गंभीरता से पढ़ सकें और इसमें आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त कर सकें।
प्रतियोगिता संयोजक वेद प्रकाश पंत ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले हरीश कालौनी, प्रकाश उपाध्याय, नवीन चंद्र जोशी, पंचदेव पांडे, राजू शंकर जोशी, गोपाल पंतोला, संतोष तिवारी और भगवान जोशी का आभार जताया। उन्होंने प्रतियोगिता का वर्चुअल शुभारंभ करने वाले संस्कृत अकादमी के सचिव डॉ. विनय विद्यालंकार के प्रति भी धन्यवाद प्रकट किया। आयोजन ने संस्कृत के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने और भाषा के महत्व पर चर्चा को नई दिशा दी।
फोटो समापन समारोह पर पुरुस्कृत किए गए बच्चे आयोजनके साथ।