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वन्यजीवों के उजड़ते आशियाने बढ़ा रहे इंसान और जंगल के बीच टकराव
चंपावत। जंगलों का सिकुड़ता दायरा और प्राकृतिक आवासों में बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप मानव-वन्यजीव संघर्ष की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं। अद्वैत आश्रम मायावती के प्रेसिडेंट स्वामी शुद्धिदानंद जी महाराज का कहना है कि मनुष्य और वन्यजीव प्रकृति के अभिन्न अंग हैं, लेकिन जंगलों के प्रति असंवेदनशीलता से उनके बीच का संतुलन प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखना और जंगलों का संरक्षण करना आवश्यक है। केवल आधुनिक उपकरणों और मुआवजे की व्यवस्था से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
क्षेत्र में बंगाल टाइगर की मौजूदगी और किंग कोबरा जैसे विषैले सांपों की उपस्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के जंगलों से घिरे कुछ तोकों में बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी लोगों की सुरक्षा को और चुनौतीपूर्ण बनाती है।
वहीं, लैंटाना घास कृषि और बागवानी को प्रभावित करने के साथ वन्यजीवों के छिपने का ठिकाना भी बन सकती है। वन संरक्षण, प्राकृतिक आवासों की बहाली और जनजागरूकता के जरिए ही संघर्ष को कम करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
इधर, चंपावत वन विभाग मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी बुधवार को पत्रकारों के समक्ष देगा। डीएफओ धेनु पुरुषोत्तमन ने मीडिया प्रतिनिधियों से इसमें सहयोग की अपील की है।