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टनकपुर उप जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों के स्थानांतरण से स्वास्थ्य सेवाएं खतरे में, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने उठाई आवाज
टनकपुर (चंपावत), 17 जून 2025:
टनकपुर और बनबसा क्षेत्र की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाले टनकपुर उप जिला चिकित्सालय में डॉक्टरों की भारी कमी के बीच अब कार्यरत चिकित्सकों के स्थानांतरण से हालात और गंभीर हो गए हैं।
इस संबंध में भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दीप चंद्र पाठक ने मुख्यमंत्री उत्तराखंड एवं स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया है। पत्र में उन्होंने कहा है कि टनकपुर व बनबसा जैसे सीमांत और घनी आबादी वाले क्षेत्र में पहले ही चिकित्सकों की भारी कमी है, ऊपर से जो डॉक्टर सेवा में लगे हैं उनका भी स्थानांतरण कर दिया गया है।
पूर्व जिलाध्यक्ष ने पत्र में लिखा –
टनकपुर एवं बनबसा सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं पहले ही सीमित हैं। अब तैनात डॉक्टरों का भी तबादला कर देने से ये अस्पताल पूरी तरह से खाली हो जाएंगे। इससे क्षेत्र की जनता को बहुत कठिनाई का सामना करना पड़ेगा और आपात स्थिति में मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ेगा, जो सभी के लिए संभव नहीं है।
उन्होंने इस निर्णय को जनविरोधी बताते हुए मांग की है कि जनहित को देखते हुए स्थानांतरण को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और इन सीमांत क्षेत्रों में स्थायी रूप से डॉक्टरों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
टनकपुर उप जिला चिकित्सालय पहले से ही सीमित संसाधनों के कारण संघर्ष कर रहा है। यदि कार्यरत डॉक्टरों का स्थानांतरण किया गया तो यह अस्पताल सिर्फ नाम मात्र का ढांचा बनकर रह जाएगा, जिससे हजारों लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।
स्थानीय लोगों की भी मांग – स्थानांतरण रुकें, अस्पताल बचे
टनकपुर और बनबसा क्षेत्र के नागरिकों ने भी प्रशासन और सरकार से अपील की है कि सीमांत क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बंद करने की बजाय, उन्हें और मजबूत किया जाए। लोगों का कहना है कि सरकार को अपनी प्राथमिकताओं में सीमांत क्षेत्रों की स्वास्थ्य सुविधा को शामिल करना चाहिए।
मुख्य मांगें:
डॉक्टरों के स्थानांतरण पर तुरंत रोक लगे
रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्तियां की जाएं
सीमांत क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता मिले
यह खबर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रशासन और सरकार के प्रति स्थानीय लोगों की अपेक्षाओं को उजागर करती है।