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टांण पंचायत में रचा गया लोकतंत्र का इतिहास, चंद्रशेखर गड़कोटी निर्विरोध चुने गए ग्राम प्रधान
चम्पावत, 03 जुलाई 2025
विकासखंड पाटी की ग्राम पंचायत टांण में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के तहत लोकतंत्र की एक मिसाल कायम हुई है। पहली बार ग्राम पंचायत के इतिहास में ग्रामवासियों ने अपने मौजूदा प्रधान चंद्रशेखर गड़कोटी को पूर्ण सहमति के साथ निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनकर क्षेत्र में सामूहिक सोच, एकता और विकास की भावना को सर्वोपरि रखा।
गुरुवार शाम ग्राम के मंदिर प्रांगण में आयोजित ग्रामसभा में समस्त ग्रामीणों ने बिना किसी मतभेद के एकमत होकर चंद्रशेखर गड़कोटी को पुनः ग्राम पंचायत का नेतृत्व सौंपा। बैठक में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी ने सर्वसम्मति से उन्हें दोबारा ग्राम सेवा का अवसर प्रदान किया।
इस ऐतिहासिक निर्णय में पूर्व जिला पंचायत सदस्य नीलम गड़कोटी, पूर्व ग्राम प्रधान खीमानंद गड़कोटी सहित तमाम जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही। आमतौर पर चुनावी खींचतान के लिए चर्चित रही इस पंचायत ने इस बार आपसी सहमति और भाईचारे का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है जो जनपद ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
निर्विरोध चयन के उपरांत ग्राम प्रधान चंद्रशेखर गड़कोटी ने समस्त ग्रामवासियों का आभार जताते हुए कहा कि यह जीत मेरी नहीं, पूरे गांव की है। उन्होंने ग्रामसभा के सर्वांगीण विकास, पारदर्शिता और सहभागिता के संकल्प के साथ सबका मुँह मीठा कराया।
ग्राम प्रधान के निर्विरोध चयन को लेकर क्षेत्र के प्रबुद्ध जनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
मनोज गड़कोटी (उत्तराखंड जनकल्याण संगठन) ने कहा,
यह क्षण ऐतिहासिक है -ग्रामसभा ने जनकल्याण और नेतृत्व की भावना को पहचानते हुए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है
प्रधानाचार्य दिनेश चंद्र गड़कोटी ने कहा कि टांण गांव की एकजुटता और समझदारी पूरे क्षेत्र के लिए आदर्श बनेगी।
चंद्रशेखर जोशी ने चंद्रशेखर गड़कोटी के जनसेवा के जज्बे को सलाम करते हुए इसे युवा नेतृत्व की सच्ची जीत बताया।
उत्तराखंड जनकल्याण संगठन के मनोज गड़कोटी ने कहा कि यह क्षण ऐतिहासिक और प्रेरणादायक है, जिसमें जनसेवा की भावना के साथ संकल्प को पहचान मिली है।
ग्राम पंचायत टांण का यह लोकतांत्रिक निर्णय यह दर्शाता है कि जब समाज एकजुट हो जाए, तो विकास के रास्ते अपने आप खुल जाते हैं। यह निर्विरोध चयन न केवल जनमत का सम्मान है, बल्कि विश्वास, सेवा और समर्पण का प्रतीक भी है।
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