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रिश्वतखोरी का पर्दाफाश: प्रभारी सचिव पूरन सिंह सैनी 1.20 लाख की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार
हल्द्वानी/सरवरखेड़ा, 22 जुलाई 2025
फल-सब्जी मंडी समिति में लाइसेंस रिन्यूवल के नाम पर रिश्वतखोरी का बड़ा मामला उजागर हुआ है। विजिलेंस टीम ने मंडी समिति के प्रभारी सचिव पूरन सिंह सैनी को मंगलवार शाम रंगेहाथ 1.20 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोप है कि सैनी ने दो दुकानदारों से लाइसेंस नवीनीकरण के बदले 60-60 हजार रुपये की मांग की थी, जबकि निर्धारित विभागीय शुल्क मात्र 250 रुपये है।
शिकायत के बाद विजिलेंस का जाल
सरवरखेड़ा निवासी शफायत चौधरी और शकील चौधरी बीते 9–10 वर्षों से मंडी में दुकान चला रहे हैं। उन्होंने जब लाइसेंस नवीनीकरण के लिए आवेदन किया, तो प्रभारी सचिव सैनी ने उनसे सुविधा शुल्क के तौर पर मोटी रकम की मांग की। जब कई प्रयासों के बाद भी कोई समाधान नहीं मिला, तो दोनों ने विजिलेंस हेल्पलाइन नंबर 1064 पर शिकायत दर्ज कराई।
मंगलवार को शाम लगभग 4:30 बजे हल्द्वानी से पहुंची विजिलेंस टीम ने मंडी समिति कार्यालय में छापा मारते हुए पूरन सिंह सैनी को रिश्वत की रकम लेते हुए रंगेहाथों पकड़ लिया।
पूछताछ जारी, परिसर में हड़कंप
गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस टीम ने सैनी और शिकायतकर्ताओं से देर रात तक पूछताछ की। जैसे ही मामले की खबर मंडी में फैली, परिसर में हड़कंप मच गया। भारी संख्या में व्यापारी व कर्मचारी कार्यालय के बाहर एकत्र हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। समाचार लिखे जाने तक विजिलेंस की कार्रवाई जारी थी और कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ था।
सेवानिवृत्ति से पहले फंसे भ्रष्टाचार के जाल में
सूत्रों के अनुसार पूरन सिंह सैनी आगामी 7-8 महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले थे। लगभग दो महीने पहले ही उन्होंने प्रभारी सचिव का कार्यभार संभाला था, जबकि इससे पहले वह मंडी समिति में 15-20 वर्षों तक अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत रहे थे।
पहले भी रहे हैं विवादों में
शफायत चौधरी और शकील चौधरी ने आरोप लगाया कि सैनी अपने पहले कार्यकाल में भी बिना रिश्वत के कोई काम नहीं करते थे। उनके खिलाफ कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। व्यापारी वर्ग में उनका नाम हमेशा विवादों में रहा।
मंडी में व्याप्त रिश्वत तंत्र का खुलासा
स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि मंडी में लाइसेंस रिन्यूवल के लिए तय विभागीय शुल्क लगभग 250 रुपये है, लेकिन अधिकारियों द्वारा 35 हजार से 60 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है। यह रिश्वतखोरी फल एवं अनाज मंडी दोनों में व्याप्त है, जिसकी शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं।