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घी संक्रांति 17 अगस्त को, परंपरा और मान्यताओं संग पर्वतीय अंचल में तैयारियां पूरी
चंपावत, 16 अगस्त 2025।
उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में पारंपरिक त्योहार घी संक्रांति (ओलगिया) इस वर्ष 17 अगस्त को बड़े उत्साह के साथ मनाई जाएगी। भाद्रपद मास की संक्रांति पर मनाए जाने वाले इस पर्व का विशेष महत्व है। एक गलत लोक मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन घी का सेवन नहीं करता, वह अगले जन्म में घोंघा (गन्याल) पैदा होता है।
त्योहार की परंपरा
इस दिन परिवारों में खासतौर पर दाल-भात, घी, मक्खन और बड़े (बड़े पकौड़े) बनाए जाते हैं। रिश्तेदारों को उपहार देने और लेने की परंपरा भी इस पर्व को खास बनाती है। भांजे, दामाद, बहनोई और अन्य जजमानी संबंधों में उपहार के रूप में अनाज, कपड़े और मौसमी फल वितरित किए जाते हैं।
सांस्कृतिक महत्व
ग्रामीण अंचलों में घी संक्रांति पर लोकगीत और लोकनृत्य का आयोजन भी होता है। यह पर्व केवल खानपान तक सीमित नहीं है बल्कि पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने और कृषि संस्कृति को सम्मान देने का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक और स्वास्थ्य दृष्टि से लाभकारी
भादो मास में वर्षा ऋतु के कारण मौसम ठंडा होने लगता है। पारंपरिक मान्यता है कि इस समय घी और मक्खन का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।
ग्रामीण इलाकों में इस पर्व की रौनक देखने लायक रहती है और लोग पूरे उत्साह से इस दिन का इंतजार करते हैं।