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स्वामी विवेकानंद पर शोध कर गीता बनीं पीएचडी, लोहाघाट महाविद्यालय का बढ़ाया गौरव, हिमालय यात्राओं और स्वामी विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता पर किया शोध, मायावती अद्वैत आश्रम के संतों का मिला मार्गदर्शन।
लोहाघाट। स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय लोहाघाट की शोधार्थी डॉ. गीता को स्वामी विवेकानंद के हिमालय प्रवास और उनके विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता पर किए गए शोध कार्य के लिए पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उनकी इस उपलब्धि से महाविद्यालय परिवार में खुशी का माहौल है। महाविद्यालय की स्थापना और उसके नाम के साथ स्वामी विवेकानंद का नाम जुड़ने के 47 वर्षों बाद अब तक गीता सहित चार शोधार्थी स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचारों और यात्राओं पर शोध कर पीएचडी प्राप्त कर चुके हैं। डॉ. गीता ने अपने शोध प्रबंध में स्वामी विवेकानंद द्वारा उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों में की गई यात्राओं, उनके विचारों, सिद्धांतों और व्यवहारिक दृष्टिकोण का स्थानीय जनजीवन पर पड़े प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया है। उन्होंने यह भी दर्शाया है कि आज के दौर में स्वामी विवेकानंद के विचार किस प्रकार समाज और युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं। यह शोध कार्य महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं स्वामी विवेकानंद विचारों के प्रखर अध्येता डॉ. प्रकाश लखेड़ा के निर्देशन में पूरा हुआ। डॉ. लखेड़ा लंबे समय से विभिन्न मंचों के माध्यम से स्वामी विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
शोध के दौरान मायावती अद्वैत आश्रम के अध्यक्ष स्वामी शुद्धिदानंद जी महाराज, स्वामी नरसिंहानंद जी महाराज, विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक पत्रिका प्रबुद्ध भारत के संपादक स्वामी दिव्यकृपानंद जी महाराज तथा प्रबंधक स्वामी सुहृदानंद जी महाराज का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन भी प्राप्त हुआ। उल्लेखनीय है कि स्वामी विवेकानंद ने वर्ष 1888, 1890, 1897, 1898 और 1901 में उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्रों की यात्राएं की थीं। उनकी अंतिम हिमालय यात्रा मायावती अद्वैत आश्रम की रही, जहां 3 जनवरी 1901 को उनके चरण पड़े थे। इसी आश्रम की स्थापना और व्यवस्थाओं के मूल सिद्धांत स्वामी विवेकानंद द्वारा निर्धारित किए गए थे, जिनका पालन आज भी किया जा रहा है। यह आश्रम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व रखता है।
महाविद्यालय परिवार ने डॉ. गीता और उनके शोध निर्देशक डॉ. प्रकाश लखेड़ा को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
फोटो पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने के बाद अपने शोध निर्देशक डॉ. प्रकाश लखेड़ा के साथ डॉ. गीता।