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सावन उत्सव में गीता धामी ने महिलाओं से किया संवाद, बोलीं-पहाड़ की नारी संघर्ष की मिसाल, आर्थिक मजबूती से बदलेगा परिवार का भविष्य।
चम्पावत। पहाड़ की महिलाएं घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ खेती-बाड़ी, पशुपालन और जंगल से घास लाने जैसे कठिन कामों को बखूबी संभालती हैं। तमाम संघर्षों के बावजूद उनके चेहरे की मुस्कान और हौसला उत्तराखंड की नारी शक्ति की पहचान है। यही वजह है कि पहाड़ की महिलाओं को ‘आयरन लेडी’ कहा जाता है। यह बात गीता धामी ने चम्पावत में आयोजित सावन उत्सव के दौरान महिलाओं से संवाद करते हुए कही। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर आयोजित सावन उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं को समूहों के माध्यम से स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला का आर्थिक रूप से मजबूत होना केवल उसके लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार के लिए बदलाव की शुरुआत है। इससे बच्चों की शिक्षा, परिवार की सामाजिक जिम्मेदारियों और जीवन स्तर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
गीता धामी ने उत्तराखंड में बदलती डेमोग्राफी और उसके सामाजिक प्रभाव को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रकृति, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकार की ओर से अवैध कब्जों और अतिक्रमण के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड की पहचान और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए सरकार दृढ़ता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीति का विषय नहीं, बल्कि उत्तराखंड की प्रकृति, संस्कृति और देवभूमि की पहचान को सुरक्षित रखने का सवाल है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर जागरूक होकर अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
माता-पिता और सास-ससुर का आशीर्वाद सबसे बड़ी पूंजी
महिलाओं से अपने मन की बात और जीवन के अनुभव साझा करते हुए गीता धामी ने कहा कि जिस घर में माता-पिता और सास-ससुर का साया बना हुआ है, उससे बड़ा सौभाग्य कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं के कार्यों और व्यवहार से माता-पिता तथा सास-ससुर प्रसन्न रहते हैं, वे वास्तव में सौभाग्यशाली हैं। अपनी सास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि “मेरी सास मेरे लिए ऊर्जा का स्रोत हैं। उनके आशीर्वाद और साथ से मुझे लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।” उन्होंने कहा कि बुजुर्गों का आशीर्वाद किसी तीर्थ से कम नहीं है।
फोटो : चम्पावत में सावन उत्सव के दौरान महिलाओं से संवाद करतीं गीता धामी।